मेट्रो वाले लड़के की गांड की चुदाई

Xxx ट्रेन सेक्स कहानी मेट्रो में मिले एक लड़के की है. उसने मेरे लंड को सहलाकर खड़ा कर दिया। मैंने उसको अपने रूम पर बुलाकर उसकी गांड चोदने का मजा लिया।

दोस्तो, ये मेरी पहली गे सेक्स कहानी है।
यह तब की बात है जब मैं दिल्ली से सटे नोएडा में रहता था।
मैं वहां पर जॉब करता था।

मेरा ऑफिस काफी दूर था और मुझे रोज मेट्रो से आना-जाना होता था।

Xxx ट्रेन सेक्स कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूं। मेरी हाइट 5.11 फीट है।
मैं देखने में सांवला हूं और जिम जाने की वजह से बॉडी काफी अच्छी है।
मेरे शरीर पर काफी बाल भी हैं।
मेरे लंड का साइज 7 इंच का है।

तो जब एक सुबह मैं ऑफिस जा रहा था तो एक मेट्रो स्टेशन से कॉलेज के कुछ लड़के भी ट्रेन में चढ़ गए।
सुबह के समय मेट्रो में भीड़ बहुत ज्यादा होती है इसलिए सभी लोग एक दूसरे से बिल्कुल सटकर ही खड़े हुए थे।

उन लड़कों में से एक लड़का लगभग 20 साल का था।
वह देखने में काफी गोरा और छरहरे बदन का था।
उसकी हाइट भी कम थी।

वो मुझसे एकदम चिपका हुआ था।

फिर जैसे जैसे भीड़ बढ़ने लगी, हम दोनों और ज्यादा एक दूसरे से सट गए।

इस सब के बीच मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड वाला हिस्सा उसके हाथ से सटा हुआ है।

ये पता लगते ही मेरा लंड एकदम से तनाव में आना शुरू हो गया।
मैं थोड़ा असहज महसूस करने लगा कि कहीं इसको पता न लग जाए।

तनाव छुपाने के लिए मैं थोड़ा पीछे खिसकने की कोशिश करने लगा।
मगर जैसे ही मैं थोड़ा पीछे होता, उसका हाथ फिर से मेरे लंड पर आकर सट जाता।

फिर मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरे लंड को सहला रहा है।
अब मुझे भी Xxx ट्रेन सेक्स में मजा सा आने लगा और मैंने लंड को वहीं सटाए रखा।

लेकिन जब मैं नीचे देखने की कोशिश करने लगा तो उसने भी मुझे देख लिया और एकदम से हाथ वहां से हटा लिया।
मगर मेरा लंड अब जोश में आ चुका था।

मैं फिर से आगे की तरफ हुआ और अपने खड़े लंड को उसके हाथ से सटा दिया।
मैंने लंड लगाकर उसकी नजरों में देखा तो वो भी मुस्करा दिया।
उसे भी समझ में आ गया कि मैं भी इसका मजा ले रहा हूं।

अगले स्टेशन पर भीड़ और भी ज्यादा बढ़ गई।
अब हम दोनों के बीच में बाल जितनी भी जगह नहीं रह गई थी, दोनों जैसे एक दूसरे की बांहों में आ गए थे।

वो लंड को अब आराम से हाथ से सहला रहा था और मैं भी नीचे की ओर पीछे हाथ ले जाकर उसकी गांड को दबा रहा था।
दोनों को ही पूरा मजा आ रहा था।

फिर उससे रुका न गया तो उसने अपने बैग को नीचे कर लिया और बैग की आड़ में मेरी पैंट की चेन वहीं पर खोलने लगा।

मैंने उसको इशारे से मना किया लेकिन वो नहीं माना।
उसने चेन खोलकर हाथ पैंट में डाल दिया और अंडरवियर के ऊपर से ही लंड को सहलाने लगा।

अब मुझे और ज्यादा मजा आने लगा और मैं जोर जोर से उसकी गांड को भींचने लगा।
उसने फिर मेरे अंडरवियर की इलास्टिक को खींचते हुए हाथ उसके अंदर दे दिया।

अब मेरा गर्म लंड नंगा उसके हाथ में था।
उसके कोमल हाथ में जाकर लंड जैसे फटने को हो रहा था।

वो लंड के टोपे की स्किन को आगे पीछे करते हुए मेरे लंड की मुठ मारने लगा और मैं जैसे स्वर्ग की सैर करने लगा।

अब मेरा मन उसकी गांड में उंगली डालने का कर रहा था।
लेकिन मेट्रो में उसकी पैंट उतारना संभव नहीं था।

जैसे जैसे ट्रेन आगे बढ़ रही थी, मेरा जोश भी आगे बढ़ रहा था।
मैं उसके चूतड़ों को जोर जोर से दबा रहा था।

वो भी मेरे लंड पर हाथ को पूरी तरह से कस चुका था।

अब मेरा माल निकलने को हो गया तो मैंने उसके हाथ को अपने हाथ से रोका और बाहर निकालने का इशारा किया।
लेकिन उसको इतना मजा आ रहा था कि उसने इशारे से हाथ निकालने से मना कर दिया।

मैंने कहा- निकलने वाला है!
लेकिन वो फिर भी नहीं रुका और मेरे अंडरवियर में ही मेरा माल छूट गया।

उसने अपने गीला हाथ बाहर निकाल लिया और रुमाल से पौंछ लिया।

फिर वो कहने लगा कि अगले स्टेशन पर उसको उतरना है।
मैंने जल्दी से अपना फोन नम्बर मोबाइल के डायल पैड में लिख दिया और उसने फोन नम्बर को अपने फोन में नोट कर लिया।

फिर मैं भी अपने ऑफिस पहुंच गया।

लेकिन उस लड़के ने मेरी कामवासना को भड़का दिया था।
उस दिन ऑफिस में भी मैंने दो बार मुठ मारी थी।

शाम को उसका मैसेज मुझे मिला।
उसने पूछा कि मैं रोज आता हूं?
मैंने कहा कि हां, रोज आता हूं।

फिर उसने अपना नाम साहिल बताया और वो बोला कि कल फिर मिलेंगे।
मैंने भी हां कर दी।

उसके बाद अगले दिन फिर हम लोग मेट्रो में मिले।
वो मेरे पास आकर खड़ा हो गया।

हम लोग फिर दूसरे दरवाजे की ओर जा खड़े हुए।

फिर जैसे जैसे भीड़ बढ़ने लगी, वो शुरू हो गया; उसने मेरे लंड को सहलाना शुरू किया।

उसका नर्म सा हाथ लगते ही मेरा लंड भी एकदम से तन गया था।

भीड़ और बढ़ी तो उसने मेरी पैंट की चेन खोल ली और हाथ अंदर दे दिया।
फिर उसने अंदर ही अंदर लंड को पकड़ कर अंडरवियर के बाहर कर लिया।

अब मेरा नंगा लंड उसके हाथ में था।
लंड हाथ में आते ही उसके चेहरे पर चुदास की प्यास और बढ़ गई।

इधर मुझे भी उसके हाथ में लंड देकर गजब का मजा आ रहा था।

उसने धीरे से मेरे कान में कहा- मुंह में लेने का मन कर रहा है।
मैंने भी चुपके से कहा- यहां तो ऐसा कुछ नहीं हो सकता।
उसके बाद उसने अपनी हथेली पर थूक लिया और फिर उसे मेरे लंड पर लगाकर उसकी मुठ मारने लगा।

कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया और सारा माल उसके हाथ में फैल गया।
उसने हाथ बाहर निकाला और दूसरे हाथ से अपनी चेन खोलकर माल को अपने अंडरवियर पर पौंछ दिया।

फिर हम लोग कुछ स्टेशनों के बाद अलग अलग हो गए।

मैं ऑफिस पहुंचा और फिर दोपहर को उसने मैसेज किया।
हम बात करने लगे।

मैंने पूछा कि उसने माल को अपने अंडरवियर पर क्यों पौंछा?
तो वो कहने लगा कि उसको वीर्य की महक लेना पसंद है।

उसके अगले दिन भी हमने मेट्रो में ऐसे ही एक दूसरे को मजा दिया।

अब मुझे अपना रूम भी बदलना था तो हम तीन-चार दोस्तों ने मिलकर एक फ्लैट किराये पर ले लिया।

एक रोज ऐसा हुआ कि इतवार का दिन था, मेरे बाकी के दोस्त अपने घर गए हुए थे और मैं रूम पर अकेला रह गया।

मैंने साहिल को फोन करके मिलने के लिए पूछा।
वो भी फ्री था और जल्दी ही मेरे फ्लैट पर आ पहुंचा।

मैं उसे देखकर बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे उसको चोदने का बहुत मन कर रहा था।
आते ही हम दोनों गले मिले और उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
मुझे भी इसमें मजा आने लगा, उसके होंठ काफी नर्म नर्म थे।

हम दोनों का जोश बढ़ता जा रहा था।

फिर मैं उसकी गर्दन पर चूमने लगा और उसकी आहें निकलने लगीं।
अब वो मेरी शर्ट के बटन खोलकर मेरी छाती को चूमने लगा।

मुझे इसमें और ज्यादा उत्तेजना होने लगी।

वो मेरी छाती पर होंठों से चूम रहा था और कभी निप्पलों को मुंह में लेकर पीने लगता था।

अब मैंने भी उसकी शर्ट उतार दी और उसकी छोटी छोटी चूचियों को चूसने लगा।

फिर मैंने उसको गोद में उठा लिया और ले जाकर बेड पर लिटा दिया।
मैंने उसकी पैंट भी निकाल फेंकी।
अब वो केवल चड्डी में था।

उसका बदन बहुत ही गोरा और एकदम से चिकना था; पूरे बदन पर कहीं भी बाल नहीं थे।

अब हम दोनों बेड पर फिर से एक दूसरे से लिपटने लगे।
फिर वो मेरे ऊपर आ गया और मुझे किस करने लगा।

उसने मेरी पैंट को खोल दिया और बिना उतारे पैंट के ऊपर से ही लंड को सहलाने लगा।
मुझे बड़ा मजा आने लगा और मैं आंखें बंद करके बेड पर लेट गया।

उसके बाद मुझे रहा न गया, मैंने पैंट नीचे कर दी और उसका मुंह अंडरवियर में दबा दिया।
वो मेरे लंड की महक लेने लगा।

फिर उसने जल्दी से मेरा अंडरवियर निकाला और लंड को मुंह में लेकर मस्ती में चूसने लगा जैसे किसी भूखे बच्चे को लॉलीपोप मिल गया हो।

मुझे स्वर्ग का सा मजा आने लगा।
मैंने उसके सिर को जोर से लंड पर दबा लिया और नीचे से कमर उठाकर उसके मुंह को चोदने लगा।

अब मेरी कामवासना काबू के बाहर होती जा रही थी।
मैंने उसके मुंह से लंड निकाला और उसके नीचे बेड पर पटक लिया; उसकी चड्डी मैंने खींचकर उतार दी।

उसकी गोरी, गोल-मटोल मस्त गांड देखकर मैं पागल हो गया।
मैं उसके चूतड़ों पर होंठों से चूमने लगा और कभी पूरे चूतड़ को मुंह में भरने की कोशिश करते हुए उसे हल्के हल्के काटने लगा।
उसकी भी आहें निकलने लगीं।

मैं उसकी गांड के छेद को उंगली से सहला भी रहा था। उसके नर्म नर्म गोरे चूतड़ देखकर उनको चोद चोदकर फाड़ने का मन कर रहा था।

अब मैंने उसे पेट के बल पटक लिया और उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद पर थूक दिया।
अपने लंड पर भी मैंने थूक लगाया और फिर उसकी गांड के छेद पर लंड को टिका दिया।
मैंने धक्का दिया तो लंड अंदर नहीं गया।

फिर मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो लंड उसकी गांड में घुस गया।
उसकी एकदम से चीख निकल गई- आआ आआ … आई!!

मैं लंड को घुसाकर वहीं पर रुक गया।
मैंने उसके चूतड़ों को सहलाया और फिर इस बीच जोर से धक्का देकर पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया।

वो छटपटाने लगा लेकिन मैंने उसको दबोचे रखा।

फिर जब वो थोड़ा नॉर्मल हुआ तो मैंने उसकी गांड चुदाई शुरू कर दी।
उसकी गर्म गर्म गांड को चोदते हुए मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

कुछ देर में उसको भी चुदने में मजा आने लगा और वो आह्ह … आह्ह … करके चुदने लगा।

मैंने उसकी कमर को पकड़ कर उसे ऊपर उठाते हुए हल्का सा झुका लिया और तेजी से उसकी गांड को पेलने लगा।

अब उसकी सिसकारियां और तेज हो गईं और वो बड़बड़ाने लगा- आह्ह … और चोदो … आह्ह … फक मी … आह्ह … चोदो … और चोदो … आह्ह!

मैं भी तेजी से उसकी गांड में लंड को अंदर बाहर कर रहा था; बीच बीच में उसकी चूचियों को भी भींच रहा था।
उसकी गांड बहुत ही नर्म थी, और मैं उस पर हल्के तमाचे भी मार रहा था।

अब उसने पीछे हाथ लाकर मेरे चूतड़ों को अपनी ओर धकेलना शुरू किया।
मुझे इससे और जोश चढ़ गया और मैंने पूरा जड़ तक लंड उसकी गांड में घुसाना शुरू कर दिया।

उसको चोदते हुए लगभग 8-10 मिनट हो गए थे; मेरा वीर्य अब निकलने की कगार पर आ गया था।
मैंने तेजी से धक्के लगाते हुए कहा- आह्ह … आने वाला है मेरा! अंदर ही छोड़ दूं क्या?
वो बोला- नहीं, मेरे मुंह में पिला दो।

जैसे ही वीर्य निकलने को हुआ, मैंने एकदम से लंड को बाहर खींचकर उसके मुंह में दिया।
फिर एक दो धक्कों में ही मेरा माल उसके मुंह में गिरने लगा।
मैंने सारा वीर्य उसके मुंह में ही पिला दिया।

हम दोनों निढाल होकर लेट गए।

उसके बाद हम नहाने गए।
नहाते हुए मैंने फिर से उसको चोदा।

वो सोमवार की सुबह तक मेरे पास ही रुका।
मैंने इस दौरान कई बार उसकी गांड मारी। चोद चोदकर मैंने उसकी गांड खोल दी लेकिन मेरा लंड भी सूज गया।

दो दिन के अंदर लंड फिर ठीक हो गया।

उसके बाद मैं अक्सर उसको मौका मिलते ही अपने फ्लैट पर बुला लेता था। मुझे उसकी गांड मारने में बहुत मजा आने लगा।

इस तरह से मुझे गे चुदाई की आदत पड़ गई। मुझे लड़कों के साथ सेक्स करने में मजा आने लगा।
साहिल को चोदने के बाद मैंने कई और लड़कों की भी गांड मारी।

अपनी गे चुदाई की अन्य कहानियां भी मैं आप लोगों के साथ जल्द शेयर करूंगा। फिलहाल, इस Xxx ट्रेन सेक्स कहानी के बारे में आप अपनी राय मुझे जरूर देना।
कहानी के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें।

आप मुझे मेरी ईमेल पर भी मैसेज कर सकते हैं।
मेरा ईमेल एड्रेस है- [email protected]

Check Also

चार लंड और मेरी अकेली गांड

गे सेक्स ग्रुप स्टोरी में पढ़ें कि मैं लड़कियों जैसा हूँ. मुझे ब्रा पैंटी पहनने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *