ट्रेन में मिली अनजान भाभी की चूत चुदाई

हॉट सेक्स इन होटल का मजा मुझे एक भाभी ने दिया जो मुझे ट्रेन में मिली थी. ट्रेन की भीड़ में मैंने उसके शरीर को सहला कर मजा लिया, फिर होटल में उसकी चूत मारी.

दोस्तो, मैं शरद इंदौर से हूँ. मेरी सेक्स कहानी में आपका स्वागत है.

ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है. मैं कोई लेखक नहीं हूँ जो इसमें मिर्च मसाला डाल सकूं. मेरे साथ जो जैसा हुआ, वो मैं वैसा ही लिख रहा हूँ.

आगे बढ़ने से पहले मैं अपने बारे में बता देता हूं. मैं एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ.

मेरी उम्र अभी 30 साल है और मेरे लंड का साइज भी, सामान्य भारतीय का जितना होता है, उतना ही है. पर ये मजबूत बहुत है, लम्बा चलता है.
मेरे लंड की तारीफ़ मेरी वाइफ मुझसे करती है. हमारी हर चुदाई में उसका पानी 2 बार जरूर निकलता है.

ये हॉट सेक्स इन होटल वाली घटना आज से दस साल पहले की है, मतलब 2011 जून की. ये सफर मेरे जीवन का बहुत ही खूबसूरत सफर साबित हुआ था.

मित्रो, जून में गर्मी कितनी होती है, ये तो आपको पता ही होगा.

बस उसी गर्मी में, भीड़ से भरी ट्रेन में, मैं इंदौर से भोपाल अपने ऑफिस के काम से जा रहा था.
मेरा एकदम से जाना हुआ था, मैंने रिजर्वेशन करवाने की कोशिश की पर मिला ही नहीं.

हालांकि तत्काल में मिल सकता था, पर मैंने उस पर ध्यान न देते हुए जनरल का टिकट ले लिया था.

जब मैं ट्रेन में चढ़ा, तब अहसास हुआ कि मैंने रिजर्वेशन न करवा कर कितनी बड़ी गलती की.
पर कर क्या सकता था.

भीड़ में जगह बनाता हुआ मैं आगे बढ़ने लगा.
उसके बाद मेरे लंड का नसीब जागा और मैं एक बला की खूबसूरत भाभी के पीछे पहुंच गया.
वो पीछे से ही इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मैंने उसका चेहरा देखने के लिए जतन करना शुरू कर दिया.

मैंने सबसे पहले तो अच्छे से जगह बनाई और उसके ठीक पीछे खड़ा हो गया.
फिर अपना जिस्म उसके जिस्म से चिपका दिया.

उससे चिपकते ही मेरे औजार ने हरकत करना शुरू कर दी और वो खड़ा होने लगा.

जैसे ही उस भाभी को अपनी गांड में मेरे लंड का कड़कपन महसूस हुआ, उसने पीछे पलट कर मुझे देखा.
कसम से उसका चेहरा देखते ही मैं उसकी खूबसूरत जवानी में खो गया.

गेहुंए रंग की काया, तीखे नैन, रसभरे होंठ, चेहरे पर पसीने की कुछ बूंदें और उनमें चिपकी उसकी लटें.
बेहद दिलकश माल थी वो!
मेरी तो आह ही निकल गई.

उसी समय मुझे भीड़ का एक धक्का लगा और मैं उससे और ज्यादा चिपक गया.

अब भीड़ ज्यादा होने की वजह से वो मुझसे कुछ कह तो नहीं पाई पर थोड़े गुस्से से मुझे देखने लगी.
उसकी तीखी नजर देख कर मुझे भी थोड़ा डर लगा और मैं उससे दूर हटने की कोशिश करने लगा.

परन्तु भीड़ ने हमें फिर चिपका दिया.
इस बार उसने कोई रियेक्ट नहीं किया.

मैं फिर पीछे को हटा लेकिन भीड़ ने फिर से हमें चिपका दिया.
ऐसा 3 से 4 बार हुआ और हर बार भीड़ हमें चिपका देती.

इससे उस भाभी को ये भरोसा हो गया कि मैं जानबूझ कर नहीं चिपक रहा था.

इस बार मैं फिर से अलग होने लगा तो उस भाभी ने मेरा हाथ पकड़ कर चिपक कर खड़े रहने का इशारा आंखों ही आंखों में कर दिया.
उसका मतलब था कि आप खड़े रहो.

अब मेरे दिमाग में शैतानी आ गई.
मैंने भी उसके हाथ को धीरे से पकड़ लिया और उसकी कमर पर उसके हाथ के साथ अपना हाथ सटा दिया.

मैं उसका किसी तरह का विरोध न पाकर उसकी कमर पर उंगलियां चलाने लगा.
उसे भी शायद अच्छा लगा था क्योंकि वो मेरा हाथ नहीं हटा रही थी.

इसी सब में एक घंटा का सफर निकल गया.

पर चार घंटे का सफर अभी और बाकी था और उन चार घंटों में रात होने वाली थी.
मतलब रात के 11 बजे भोपाल स्टेशन आता है.

एक घंटा का सफर होने के साथ ही अंधेरा होना भी शुरू हो गया था और मैं उस अंधेरे का फायदा उठाने की सोचने लगा.

अब मैंने धीरे धीरे अपनी उंगलियों की रगड़ ऊपर करना शुरू की और उसके बोबे तक उंगलियों को ले गया. नीचे से अपने लंड का दबाव भी उसकी गांड की दरार में बढ़ाता गया.
अपने जिस्म की गर्मी के साथ उसके कान के पीछे अपनी सांसों की गर्मी भी छोड़ने लगा, जिससे वो भी गर्म होने लगी.

थोड़ी ही देर में उसने भी रेस्पॉन्स देना चालू कर दिया.
भाभी अपने आपको बड़ी संयमता से हिला रही थी और मजे ले रही थी.
वो आह उन्ह जैसी कोई आवाज भी नहीं कर रही थी.
यदि वो करती तो शायद हमारा पकड़ा जाना तय था.

अब तो वो भी मेरे लंड पर अपनी गांड चलाने लगी थी.
मेरे हाथ को अपनी साड़ी से ढक लिया था ताकि कोई हमें देख न सके.

उस भाभी की तरफ से इतना रेस्पॉन्स मिलते ही मैंने डायरेक्ट उसके एक बोबे पकड़ लिया और सहलाना चालू कर दिया.

लोगों की नजरों से बचते हुए मैं उसके कंधे पर किस भी करने लगा जिससे वो और ज्यादा गर्म होने लगी.
अब मैंने उसे थोड़ा खिसका कर खिड़की की तरफ कर लिया. उधर एक साइड डब्बे की खिड़की थी और दूसरी साइड लोग खड़े थे.

मैं भी थोड़ा तिरछा हुआ और मैंने अपना लंड पैंट से निकाल कर भाभी की गांड में साड़ी के साथ गड़ाने लगा.
उसे भी कुछ अहसास हुआ, तो उसने हाथ पीछे ले जाकर देखा.

उसके हाथ में मेरा गर्म गर्म लंड आ गया था.
उसने एकदम से चौंक कर अपना हाथ हटाया और मुझे देखने लगी.

मैंने भी उसी समय उसके निप्पल को धीरे से दबाया और फिर से उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखवा दिया.

अब वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी और मैं उसके बोबे के साथ मस्ती करने लगा.

उसके हाथ से लंड सहलाने और हिलाने की थोड़ी देर की मेहनत के बाद मेरे लंड ने पिचकारी मार दी और मैं खिड़की से बाहर खाली हो गया.

अब वो मुझे बड़ी हसरत से देखने लगी कि मेरा काम तो हो गया, उसका कैसे होगा.
मैं भी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत के पास हाथ ले जाकर धीरे धीरे सहलाने लगा.
पर उसे मजा नहीं आया क्योंकि हम दोनों ज्यादा जोर से नहीं कर पा रहे थे.

तभी एक स्टेशन आ गया और ट्रेन से बहुत से लोग उतरने लगे.
अब उस भाभी को तो बैठने की जगह मिल गई थी मगर मुझे नहीं मिली.

फिर भी वो भाभी सबसे कार्नर की सीट पर बैठी और मुझे देखने लगी.
मैंने भी उसके मन की बात को पढ़ते हुए खिड़की पर ही अपनी गांड थोड़ी सी टिका दी और गांड के बल बैठ गया.
साथ ही मैंने अपने पांवों को उस भाभी की सीट पर रख दिए.

अंधेरे का फायदा उठाते हुए मैंने अपने पांव का एक अंगूठा उसे गड़ाया और उसे इशारे से समझाया कि अपने पांवों को फैला ले.
उसने एक पांव मोड़ कर सीट पर रख दिया और मैं उसकी साड़ी के साइड से पांव अन्दर करके उसकी चूत को सहलाने लगा.

लोगों की नजरों से बचते हुए मैंने उसकी चूत को सहलाना चालू कर दिया.
चूत सहलाते हुए मैंने उसको भी पानी निकालने पर मजबूर कर दिया और वो भी शांत होकर बैठ गई.

कुछ समय बाद ट्रेन एक स्टेशन पर रुकी और ट्रेन से लोग उतरने लगे.
अब मैं भी उसी भाभी के पास बैठ गया पर अब कुछ नहीं हो सकता था क्योंकि लगभग सभी लोग सीटों पर बैठ चुके थे और हम कुछ हरकत करते तो पकड़े जाते.
इसलिए बाकी सफर एक दूसरे को देखते हुए ही काट लिया.

भोपाल उतरने से पहले हमने एक दूसरे के नम्बर लिए और विदा ले ली क्योंकि स्टेशन पर भाभी का पति उसे लेने आया था.
वो मुझे कनखियों से देखती हुई अपने पति के साथ चली गई.

मुझे मालूम था कि यदि मैं आगे बढ़ा और मैंने मन बनाया तो ये भाभी मेरे लंड के नीचे निश्चित आ जाएगी.
चूंकि वो एक गदर माल थी इसलिए मैंने भी मन बना लिया था कि इसको चोद कर ही वापस इंदौर जाऊंगा.

उसके जाते ही मैंने चाय की दुकान की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए.
फिर रेलवे के यात्री निवास में एक पलंग लेकर सो गया.

सुबह उठा और सभी कामों से फारिग होने के बाद मैं अपने ऑफिस के काम में लग गया.

काम निबटाते हुए मुझे चार बज गए.
उसके बाद मैं फ्री हो गया.
मेरी ट्रेन रात में थी.

मैंने उस भाभी को फोन लगाया.
एक घंटी जाते ही मैंने फोन काट दिया.

अभी एक मिनट ही हुआ था कि उसका फोन पलट कर आ गया.
मैंने इधर उधर देखा और उसका फोन उठा लिया.

भाभी- हैलो!
मैंने- हां जी मैडम, क्या हाल चाल हैं?

भाभी ने मुझे पहचान लिया और ठंडी आह भरती हुई बोली- आग लगी पड़ी है.
मैंने कहा- तुम्हारे पास फायर ब्रिगेड तो है, बुझवाई नहीं उससे अपनी आग?

भाभी- वो फायर बिग्रेड नहीं है. वो खुद फुकी हुई दुकान है. उसकी लुल्ली में दम होती, तो तुमसे न फंसती. फिर वो अभी अभी बाहर भी चला गया है और अब दो दिन बाद वापस आएगा.
मैंने मन में सोचा कि ये तो साली पूरी रात के लिए भी रेडी है.

मैंने सामने से कहा- क्या बात कर रही हो जानम … मैं कौन सा अनोखा हथियार वाला हूँ. तुम्हें तो मुझसे बड़े बड़े फन्ने खां मिल जाएंगे!
वो बोलीं- ऐसे तो मिल जाएंगे, पर उसके लिए मैं क्या सड़क पर खड़ी हो जाऊं?

मैं उसकी बात से समझ गया कि ये भाभी लंड लेना तो चाहती है लेकिन कोई रांड नहीं है कि किसी से भी चुद जाए.
मैंने फिर भी उससे कहा- क्या तुम्हें अभी तक कोई ऐसा मर्द नहीं मिला, जो तुम्हारी आग बुझा दे?

वो मेरे सवाल को नजरअंदाज करती हुई बोली- तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने कहा- शरद … और तुम्हारा?

भाभी- संजना कह सकते हो.
मैंने कहा- तुम्हारा नाम संजना है या यूं ही किसी संजना का नाम ले लिया.

वो हंसी और बोली- नाम में क्या रखा है? आम खाओ, पेड़ क्या गिनना?
मैं समझ गया कि ये नाम बताना नहीं चाहती है.

मैंने कहा- जब नाम नहीं बताना चाहती हो, तो घर पर भी नहीं बुलाओगी है ना!
वो हंस दी और बोली- सही पकड़े हैं.

मैंने कहा- हां पकड़े तो सही हैं, बस अब सही से चोद और दूँ तो चैन मिले.
वो हंस कर बोली- किसी होटल में पहुंच कर फोन करो. मिल कर मस्ती करेंगे.

मैंने कहा- चलो मैं तुम्हें अभी फोन करता हूँ.
मैंने उससे फोन पर बात बंद की और होटल के लिए गूगल किया.

नजदीक में ही एक ठीक-ठाक होटल मिल गया.
कमरा भी एसी था. एक हजार रूपए लगे.

मैंने कमरे में पहुंच कर संजना को फोन किया.
उसने मेरा नम्बर देखा तो झट से फोन उठा लिया.
मैंने कहा- होटल के कमरे में हूँ. आ जाओ.

उसने होटल का नाम पूछा और बीस मिनट में वो मेरे सामने थी.
उसे देख कर लंड एकदम से अकड़ गया और चूत चूत करने लगा.

अगले दस मिनट में हम दोनों एकदम नंगे थे और 69 में होकर एक दूसरे का लंड चूत चूस रहे थे.
वो बहुत प्यासी थी.

उसने चित लेट कर मुझे ऊपर आने का इशारा कर दिया.
मैंने झट से चूत में लंड फंसाया और धक्का दे दिया.
वो आह करके लंड गड़प कर गई.

मैंने चुदाई की गाड़ी सरपट दौड़ा दी.

हॉट सेक्स इन होटल के आधा घंटा में वो दो बार झड़ी और मेरी चुदाई की ताकत की कायल हो गई.
उस दिन मैंने उसे दो बार चोदा और वो खुश होकर चली गई.

मैंने भी उसे नहीं रोका. मुझे रात की गाड़ी से इंदौर वापस जाना जरूरी था.
दोस्तो, ये मेरी सच्ची हॉट सेक्स इन होटल की कहानी थी. आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
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