मैंने दो लंड का मज़ा एक साथ लिया

ऑफिस सेक्स हॉट कहानी में पढ़ें कि मैं बिंदास लड़की हूँ, सेक्स बहुत पसंद करती हूँ. मेरे ऑफिस ले सब लोग मुझे चोदना चाहते हैं पर मैंने किसी को भाव नहीं दिया. पर एक दिन …

मैं रोहिणी हूँ दोस्तो, मैं एक बड़ी प्राइवेट कंपनी में काम करती हूँ।

मैं 26 साल की एक मदमस्त अपनी धुन की पक्की लड़की हूँ। मैं पढ़ी लिखी हूँ, खूबसूरत हूँ और बोल्ड हूँ। मैं यहाँ इस शहर में अपने फ्लैट में रहती हूँ।

मुझे साड़ी ब्लाउज़ का पहनावा बहुत अच्छा लगता है इसलिए मैं अक्सर इसी लिबास में रहती हूँ।

मुझे घूमने का बड़ा शौक है और अपनी मोटर साइकिल पर तो खूब घूमती हूँ, लड़कों से खूब बातें करती हूँ, उनसे दोस्ती भी बना लेती हूँ और बड़े लोगों से भी खूब खुल कर बातें करती हूँ।

सेक्स मुझे बहुत पसंद है।
मैं हर रोज़ पोर्न देखती हूँ; अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ती हूँ, खास तौर से रेहाना खान की लिखी हुई कहानियां क्योंकि वह बहनचोद निडर होकर बिंदास लिखती है।

उसकी कहानियां पढ़ कर तो मेरे कपड़े अपने आप उतर जाते हैं और मेरी उंगलियां मेरी चूत में घुस जातीं हैं।
रेहाना बुरचोदी बहुत गन्दा लिखती है पर बड़ा मजेदार लिखती है।

अक्सर इन कहानियों की चर्चा मैं अपने ऑफिस की लड़कियों से करती हूँ।
अब तो वो भी पढ़ने लगीं हैं रेहाना की कहानियां।

मैं चूँकि अपने काम में बहुत अच्छी हूँ और मेरे काम से मेरे बॉस बहुत खुश रहते हैं इसलिए मुझसे कुछ लड़कियां और कुछ लड़के जलते भी हैं।
कुछ लड़के मुझे बुरी नियत से भी देखते हैं; आते जाते मुझ पर निगाह रखते हैं, कभी कभी कमैंट्स भी पास करते हैं।

वैसे मैं भी एन्जॉय करती हूँ. पर जब यह सब एक सीमा से बाहर हो जाता है तो बोलना पड़ता है।

तो मजा लें मेरी ऑफिस सेक्स हॉट कहानी का!

एक बार मैं अपनी मोटर साइकिल से जा रही थी तो सामने से दो लड़के मेरे सामने आ गए।
वो दोनों मेरी कंपनी के ही लड़के थे; मैं दोनों को अच्छी तरह पहचानती थी।

एक था धीरज और दूसरा था नकुल!
दोनों ही एक ही मोटर साइकिल पर थे।

उन्होंने मेरा रास्ता रोका और मुझसे बहस करने लगे।
मैं भी वैसे ही जवाब देने लगी।

मैंने कहा- तुम भोसड़ी वालो … मेरा क्या उखाड़ लोगे? मैं तेरी शिकायत कर दूँगी तो तुम्हारी गांड फट जाएगी मादरचोदो।
लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ.

बल्कि नकुल बोला- तू बहुत ज्यादा ही बोल रही है रोहिणी … आज कुछ भी हो सकता है. फिर न कहना कि बताया नहीं!
मैंने कहा- क्या करेगा तू मेरा रास्ता रोक कर? माँ चुदायेगा तू अपनी मुझसे? गांड मरवायेगा तू अपनी मुझसे?

तब तक धीरज उतरा और मुझे खींच कर मोटर साइकिल से उतार दिया।
इतने में एक कार आ गयी और दोनों मुझे कार में बैठा कर कहीं ले जाने लगे।
मैंने कहा- अरे, मुझे कहाँ ले जा रहे हो? मैं अभी पुलिस को फोन करती हूँ।

मैं फोन करने लगी तो मुझसे जबरदस्ती मेरा फोन छीन लिया। मैं परेशान नहीं हुई … मुझे मालूम था कि ये दोनों लड़के बदमाश नहीं है शरारती जरूर हैं।
मैंने कहा- यार धीरज, देखो इतनी भी शरारत अच्छी नहीं होती. मुझे बात तो करने दो. मेरा मोबाइल क्यों छीन लिया? वापस करो मेरा फोन! ठीक है, मैं पुलिस को फोन नहीं करुँगी।

मैं थोड़ी सी छीना झपटी करने लगी लेकिन मुझे फोन नहीं मिला।
मैं समझ रही थी कि ये लोग मुझे कहीं रास्ते में छोड़ देंगे। किडनैपर तो हैं नहीं … मेरे कॉलीग हैं मेरे साथ काम करने वाले हैं। इनकी गिनती अच्छे लोगों में की जाती है।

लेकिन अब मैं ऑफिस से काफी दूर निकल आयी थी।
धीरे धीरे मुझे चिंता होने लगी।

इतने ज्यादा मोड़ मिल गए कि मैं रास्ता ही भूल गयी, मुझे कुछ भी याद नहीं रहा।
मैं सोचने लगी कि आखिर ये लोग चाहते क्या हैं मुझसे? मैंने इनका क्या बिगाड़ा है जो ये लोग मुझे उठाकर यहाँ ले आए हैं।

फिर एक जगह कार रुकी, मुझे नीचे उतारा गया और पकड़ कर लिफ्ट तक ले जाया गया।
लिफ्ट में चढ़ कर मुझे दूसरी मंजिल पर ले जाया गया।

मैं किसी घर में दाखिल हुई और मुझे एक सोफा पर बैठा दिया गया।
घर तो अच्छा था साफ़ सुथरा था; मैं चुपचाप बैठ गयी।

इतने में धीरज ने तीन गिलास और एक व्हिस्की की बोतल लाकर हमारे सामने टेबल पर रख दिया।
एक जग में पानी भी रखा।

विकास में तीन पैग बनाये और मुझे देते हुए कहा- लो रोहिणी, अब हमारे साथ शराब पियो. मुझे मालूम है कि तुम ड्रिंक लेती हो।
यह बात सही है कि मैं ड्रिंक लेती हूँ।

मैंने भी चियर्स कहा और ड्रिंक लेने लगी।
मैं समझी कि ये लोग मेरे साथ ड्रिंक लेकर मुझे छोड़ देंगे.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

एक पैग खत्म हो गया और दूसरा चालू हो गया।

फिर अचानक दोनों मेरे सामने एकदम नंगे हो गए और अपना अपना लंड खोल कर मेरे सामने खड़े हो गए।

लंड देख कर मेरे बदन में आग लग गयी।
मैंने बड़े प्यार से कहा- अच्छा तो मुझे अपना अपना लंड दिखाने के लिए यहाँ लाये हो? ऐसा है तो तुम मुझसे वहीं कह देते? मैं तुम्हारा लंड वहीं पकड़ कर देख लेती. बाथरूम में ही देख लेती तेरा लंड या फिर किसी सिनेमा हाल में जाकर अँधेरे में पकड़ कर देख लेती तेरा लंड! लंड दिखाने के लिए इतनी क़बायत करने की क्या जरूरत थी? तुम तो मुझसे वहीं कह सकते थे कि चलो रोहिणी हमारा लंड पकड़ कर देखो, मैं देख लेती तुम दोनों के लंड! तुम दोनों बहनचोद बिल्कुल बेवकूफ निकले।

वैसे एक बता बताऊँ दोस्तो, मुझे दोनों ही लंड बड़े अच्छे लगे और उन्हें देख कर मेरी चूत में आग भी लग गयी.
लेकिन मैं यह सब ज़ाहिर नहीं होने देना चाहती थी।

लंड दोनों ही चिकने थे, बिना झांट के थे और उनके पेल्हड़ भी चिकने थे। लंड के साइज देख कर तो मैं मस्त हो गयी लेकिन मैं बिलकुल खुल कर सामने नहीं आ रही थी।

मेरे मन में था कि अगर ये दोनों मिलकर मुझे चोदें तो मैं ख़ुशी ख़ुशी चुदवा लूंगी.
पर मैं अपने मन की बात बताना नहीं चाहती थी।
मैं चाहती थी कि उनके लंड में बहनचोद और आग लगे।

इतने में नकुल बोला- यार धीरज, ये भोसड़ी वाली रोहिणी ऐसे काबू में नहीं आएगी। ऑफिस में तो हमेशा सब पर सवार रहती है। किसी को भी अपने कंधे पर हाथ नहीं रखने देती और यहाँ कहती है कि मैं लंड कहीं और पकड़ लेती। कितना झूठ बोल रही है ये हरामजादी रोहिणी … इसकी माँ का भोसड़ा! आज मैं इसे नंगी करने इसकी गांड में ठोक दूंगा लंड!

मैंने कहा- हाय दईया, क्या तुम लोग गांडू हो? गांड मारते हो तुम लोग? मर्द नहीं हो क्या?
उनको मेरी इस बात से और मिर्ची लग गई।

मुझे कोई डर तो था नहीं … ये लोग कोई अपरिचित तो थे नहीं!
मैं तो इन दोनों की छठी पसनी सब जानती हूँ। ये साले मेरा क्या उखाड़ लेंगे!

धीरज बोला- देख रोहिणी, मुझे मालूम है कि तू बहुत गालियां देती है. आज मैं तुझे गालियां दूँगी मादरचोद रोहिणी … तेरी बहन की बुर … तेरी माँ का फाड़ डालूँगा भोसड़ा!
मैंने फिर चिढ़ाते हुए कहा- मेरी माँ का भोसड़ा फाड़ने के लिए तेरे लंड में दम तो है नहीं … तेरे जैसे लंड से तो एक चुहिया की बुर भी नहीं फटेगी. तू भोसड़ा क्या फाड़ेगा? बन्दर की नूनी जैसे लंड लिए घूमते हो तुम लोग! तुम क्या फाड़ोगे मेरी माँ का भोसड़ा? मेरी माँ का भोसड़ा फाड़ने के लिए मर्दों के हक्कानी लंड चाहिए बच्चों के छोटे छोटे लंड नहीं!

वो दोनों बुरी तरह चिढ़ गए और मेरे कपड़े खोलने लगे।
मैंने इंकार किया, रोकने की कोशिश की मगर दोनों जुट कर मुझे नंगी करने लगे।
जद्दोजहद के बावजूद दोनों ने मुझे ऊपर से नंगी कर ही दिया।

मेरी दोनों मस्तानी चूचियाँ उनके सामने नंगी हो गयीं।
मेरी चूचियाँ देख कर उनके लंड साले और तन कर हिनहिनाने लगे।

नकुल बोला- यार इसके बूब्स तो बड़े सेक्सी और हॉट हैं।
धीरज ने कहा- मन करता है कि लंड इन्ही दोनों के बीच में पेल दूँ.

मैंने मन में कहा- अरे मादरचोदो पेल दो न लंड मेरी चूचियों में? मना कौन कर रही हूँ। मैं तो खुद पेलवाने के लिए तैयार हूँ। ये तो बस नखरे दिखा रही हूँ मैं!

तब तक धीरज ने मेरे मना करने के बावजूद मेरी जींस उतार कर फेंक दी।
मैं मादरचोद दोनों के सामने एकदम नंगी हो गई।

अब तो माहौल कुछ और ही हो गया।
इधर मैं भी नंगी हो गई उधर वो दोनों नंगे थे ही!

मेरी चूत पर छोटी छोटी झांटें थीं लेकिन केवल चूत के ऊपर चबूतरा वाली जगह पर ही!
चूत जहाँ से शुरू होती है वहाँ से नीचे एक भी झांट नहीं थी … वह जगह बिल्कुल चिकनी थी।

धीरज मेरी चूत बड़े गौर से देखने लगा, मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगा, चूत पर उंगलियां फिराने लगा.
मुझे गुदगुदी होने लगी, अच्छा लगने लगा।

धीरज ने मेरी टाँगें फैलाकर अपना मुंह घुसेड़ दिया और मेरी बुर चाटने लगा।
इधर नकुल मेरी चूचियाँ बड़े प्यार से सहलाने लगा, चूमने लगा और मेरे निप्पल चूसने लगा।

उधर बुर चटवाने का मज़ा, इधर चूचियाँ चूसवाने का मज़ा, मुझे दोनों तरफ से बहुत ही अच्छा लगने लगा।
मैं इतने में बहुत ज्यादा गर्म हो गयी। मैं अंदर से चुदने के लिए तैयार हो गयी।

मुझे दोनों लोग बहुत अच्छे लगने लगे।
जानते हो दोस्तो कि क्यों?
क्योंकि उनके लंड मुझे पसंद आ गए थे।

फिर क्या … मैंने एक हाथ ने नकुल का लंड पकड़ लिया और दूसरे हाथ से धीरज का लंड।
मैं आहिस्ते आहिस्ते बड़े प्यार से दोनों लंड मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करने लगी, ऊपर नीचे करने लगी, मुठियाने लगी दोनों लंड!
लंड भी बढ़ने लगे, मस्ती करने लगे और सख्त होने लगे।

मेरा मूड एकदम बदल चुका था।
मुझे सच में दोनों लंड बारी बारी से चाट चाट कर बड़ा मज़ा आ रहा था।
दोनों ही लंड टक्कर के थे. दोनों की लम्बाई और मोटाई लगभग बराबर थी। फर्क इतना था कि धीरज के लंड का सुपारा अंडाकार था और नकुल के लंड का एकदम गोल छतरी जैसा था।
मज़ा दोनों मुझे खूब दे रहे थे।

धीरज मेरी बुर चाट चाट कर मुझे मस्त कर रहा था और नकुल मेरी चूचियाँ चाट चाट कर!
मैंने कहा- हाय धीरज, बड़ा अच्छा लग रहा है यार! तुम बुर अच्छी तरह चाट रहे हो। वॉवो क्या बात है यार अपनी जबान पूरी अंदर तक घुसेड़ रहे हो. वाह लगता है कि तुम कई लड़कियों की बुर चाट चुके हो। चोद डालो मेरी बुर अपनी जबान से!

उसने जबान और अंदर तक घुसा दी।
वह पागलों की तरह चाटने लगा मेरी बुर!

इधर नकुल तो दबा दबा कर मेरे स्तनों का खूब मज़ा लूट रहा था।
मैं भी हर पल का मज़ा लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।

मैंने सोच लिया कि अब मैं इन दोनों से खूब झमाझम चुदवाकर ही वापस जाऊंगी।
तो मैंने कहा- यार, तुम दोनों मुझे ऐसे ही मज़ा देते रहो भोसड़ी वालो!

अब मेरे सब्र का बाँध टूट गया। मेरी चूत बहुत ज्यादा ही गर्म हो गयी, धधकने लगी थी मेरी चूत बुरचोदी।
मुझे बुर के अंदर लंड की जरुरत महसूस होने लगी थी।

मेरे मुंह से निकला- हाय मेरे राजा धीरज … अब देर न करो और पेल दो अपना लंड मेरी बुरचोदी बुर में! चोद डालो मेरी बुर!

बस फिर क्या था … धीरज घूमा और पेल दिया अपना मूसल जैसा लंड एक ही बार में मेरी बुर के अंदर!
मैं चीख पड़ी- हाय रे … मर गई मैं! बेरहम धीरे धीरे नहीं पेल सकता तू माँ का लौड़ा … एक ही बार में घुसा दिया पूरा लंड … मैं कहीं भागी जा रही हूँ क्या? धीरे धीरे चोदो न प्लीज। थोड़ा तो दम लेने दो मेरी चूत रानी को!

वह मादरचोद एकदम धीमा हो गया.
तो मैंने उसे ललकारा और कहा- यार, क्या बच्चों की तरह पेल रहा है … मर्दों की तरह लंड पेलो न! मर्दों की तरह चोदो बुर … खूब तेज तेज चोदो। अब मेरी बुर तुम दोनों के लंड खाने के लिए तैयार है, खूब धकाधक चोदो।

धीरज ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई तो मज़ा आने लगा।

मैं बोलने लगी- हाय मेरे राजा, बड़ा मज़ा आ रहा है. ओ माय गॉड … कितना अच्छा लग रहा है. कितना बढ़िया है तेरा लंड! मुझे और चोदो, लंड पूरा घुसा घुसा के चोदो। मैं बहुत चुदासी हूँ। हाय दईया बड़ा मोटा है लंड तेरा धीरज। पहले क्यों नहीं पेला लंड तूने मेरी चूत में। पहले क्यों नहीं चोदा मुझे?

बस फिर थोड़ी देर में धीरज हटा तो नकुल ने पेल दिया लंड मेरी चूत में!
वह भी भोसड़ी का अपने बाप का माल समझ कर चोदने लगा मेरी बुर!
उसका लंड मुझे अलग तरह का मज़ा देने लगा।

किसी ने सच ही कहा है कि जितने तरह के लंड, उतने तरह का मज़ा मिलता है चुदाई में!

अचानक नकुल बोला- यार रोहिणी, मैं तुझे पीछे से चोदना चाहता हूँ।
मैंने कहा- तो फिर चोदो न … बिल्कुल चोदो, मैं तैयार हूँ.

मैं फिर घोड़ी बन गयी और वह पीछे गया और लौड़ा गच्च से पेल दिया अंदर!
मैंने धीरज को अपने सामने लिटा लिया और झुक कर उसका लंड चूसने लगी।

अब एक लंड मेरे मुंह में और एक लंड मेरी बुर में … मुझे तो फिर डबल मज़ा मिलने लगा।
मैं खुश इस बात से थी कि चलो इन लड़कों ने मुझे चोदने के बजाय कुछ और नहीं किया।

मैंने भी ख़ुशी ख़ुशी चुदवा कर उन्हें भी मज़ा लेने दिया।
चेहरे से दोनों खुश नज़र आ रहे थे।

नकुल बोला- यार धीरज, पद्मा की बुर से बेहतर है रोहिणी की बुर! कल पद्मा ने इतनी मस्ती से नहीं चुदवाया था जितनी मस्ती से रोहिणी आज चुदवा रही है।
धीरज ने कहा- जानते हो क्यों? क्योंकि पद्मा पहले से चुदी हुई थी और रोहिणी चुदी हुई नहीं है। इसकी चूत एकदम फ्रेश है। इसने लंड जरूर पकड़ा होगा पर चुद यह आज पहली बार रही है वह भी हम दोनों से एक साथ।

तब तक मैं भी खलास हो गयी और वो दोनों भी!
लंड दोनों एक एक करके झड़ने लगे और मैंने दोनों झड़ते हुए लंड चाटने का पूरा मज़ा लिया।

फिर दोनों मुझे बड़े प्यार से मेरे घर तक छोड़ कर गए।

तो कैसी लगी यह मेरी ऑफिस सेक्स हॉट कहानी आपको?
मुझे जरूर बताइयेगा।
[email protected]

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