मेरी बहन ने अपनी सीलपैक बुर फड़वा ली

देसी बुर Xxx कहानी मेरी छोटी बहन की पहली चुदाई की है जिसे मैंने अपनी आँखों से देखा. मेरी बहन की एक सहेली चालू थी. उसी ने मेरी कुंवारी बहन को अपने यार से चुदवा दिया.

दोस्तो, मेरी बहन ज़ियारा और मेरी उम्र में 4 साल का अन्तर है. वो मुझसे छोटी है.

ये देसी बुर Xxx कहानी बहुत पहले की है.
पड़ोस की एक दीदी अक्सर हमारे घर आया करती थीं.
उनकी ज़ियारा से ट्यूनिंग बहुत अच्छी थी, वो कहीं भी जातीं, तो उसे साथ लेकर जाती थीं.

पता नहीं कैसे मुझे कुछ अजीब सा शक होने लगा.

एक दिन पापा मम्मी को कुछ दिन के लिए बाहर जाना पड़ा.
दीदी को मालूम हुआ तो उन्होंने ज़ियारा से कुछ बात कही.

मैं चुपके से सुन रहा था. मैं बस इतना समझ पाया कि मेरे स्कूल जाने के बाद कुछ होना है.

दूसरे दिन मैंने ज़ियारा से पूछा- स्कूल नहीं जाना क्या?
उसने मना कर दिया.

वो जैसे नहाने गयी, मैंने कहा- मैं जा रहा हूं, दरवाजा बंद कर लेना.
उसने हामी भर दी.

मैं स्कूल न जाकर ऊपर कमरे की टांड में छुपकर बैठ गया.

ज़ियारा नहाकर निकली और दरवाजा बंद करने के बाद उसने उन दीदी को फोन लगाया.
उधर से आवाज आते ही वो बोली- आ जाइए, भैया गए.

कुछ देर बाद वो दीदी आ गईं.
उन्होंने आज बहुत ज्यादा मेकअप किया हुआ था.

उन्होंने ज़ियारा को भी लिपिस्टिक लगाकर तैयार किया.
मैं बस इतना समझ पाया कि कोई आने वाला है.

मैं ज़ियारा को देखकर हैरान था, पर कुछ समझ नहीं पा रहा था.

इतनी देर में डोरबेल बजी.
ज़ियारा ने दरवाजा खोला, बाहर दो आदमी थे.

उनमें एक करीब 24-25 का युवक था और दूसरा करीब 35 से 40 वर्ष का आदमी था.
वो दोनों अन्दर आ गए.

उनके अन्दर आते ही ज़ियारा ने दरवाजा बंद कर लिया.
दीदी ने ज़ियारा से कहा- जाओ, अन्दर से कुछ नाश्ता ले आओ.

ज़ियारा किचन की ओर जाने लगी तो वो सब उसे पीछे से देखकर मुस्कराने लगे.
उन्होंने एक दूसरे को आंखों से कुछ इशारे किए.

तभी ज़ियारा चार गिलासों में कोल्डड्रिंक और मिठाई लेकर आई.

वो युवक उठकर उन दीदी के बगल में बैठ गया और दीदी से बोला- मिठाई खिलाइए.
तो दीदी ने मुस्कराते हुए एक रसगुल्ला अपने मुँह में लेकर उस युवक को खींच कर उसके मुँह में रसगुल्ला डाल दिया.

मैं हैरान रह गया.

वो बड़ी उम्र का आदमी बहुत गौर से ज़ियारा को देख रहा था.
उधर सामने सोफे पर दीदी और वो लड़का एक दूसरे के मुँह में जीभ डालकर खा रहे थे.

ज़ियारा दोनों हाथों अपनी स्कर्ट को पकड़ कर दबाए जा रही थी. शायद उसे कुछ अजीब सा लग रहा था.
थोड़ी देर बाद उस युवक ने ज़ियारा से अन्दर वाले कमरे में, जिसमें मैं था, जाने को कहा.

ज़ियारा और वो आदमी उठकर अन्दर आ गए.
उनके अन्दर आते ही दीदी ने बाहर से दरवाजा बंद कर लिया.
अब कमरे के अन्दर वो आदमी और ज़ियारा थे.

उसने ज़ियारा से पूछा- क्या तुम्हें मालूम है कि ये लोग क्या कर रहे हैं?
ज़ियारा ने ‘नहीं.’ में सर हिलाया.

उसने कहा- ज़ियारा शर्माओ मत, मुझे अपना दोस्त समझो.
तभी उसने एक चॉकलेट और एक फोन जेब से निकाल कर ज़ियारा को गिफ्ट कर दिया.

ज़ियारा के चेहरे पर स्माइल सी आ गयी.
तभी उस आदमी ने कहा- ज़ियारा, जब हम दोनों दोस्त बन ही गए हैं, तो चलो बाहर का नजारा साथ में देखते हैं.

ये कह कर उसने धीरे से खिड़की खोल दी.
खिड़की खुलते ही ज़ियारा और मेरी आंखें सन्न रह गईं.

दीदी पैंटी और ब्रा में थीं और वो लड़का पूर्णत: नग्न था.
दीदी उसके लंड पर रसगुल्ले की चाशनी गिराकर लंड चाट रही थीं.

ज़ियारा फटी हुई आखों से देख रही थी.
वो आदमी ज़ियारा के पीछे आ गया और उसने कहा- ज़ियारा, आओ हम भी प्यार करें.

मैं हैरान था कि कहां वो आदमी और कहां मेरी बहन.

उसने धीरे से अपनी पैंट निकाली. फिर अपनी शर्ट, बनियान चड्डी भी निकाल कर फेंक दी.

उसका लंड बहुत मोटा था और बहुत फूला हुआ था.
उस समय उसका लंड एकदम तना हुआ था और आसमान की तरफ देख रहा था.

मैंने देखा कि उसका लंड देख कर मेरी बहन की आंखें हैरत से फ़ैल गई थीं.
उसने अपना मुँह फेर कर खिड़की की तरफ कर लिया था.

वो आदमी लगातार ज़ियारा की टांगों के बीच में देख रहा था.
उधर ज़ियारा खिड़की से बाहर दीदी को देखने में लगी थी.

अचानक उस व्यक्ति ने ज़ियारा के हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया.
ज़ियारा अचानक से चौंक गयी.

जैसे ही वो पलटी, उस आदमी ने ज़ियारा को गोद में उठाया और पलट दिया.
मतलब अब ज़ियारा का सर नीचे और टांगें ऊपर उसके गले पर आ गई थीं.

ज़ियारा एक हाथ से अपनी स्कर्ट को पकड़ने की नाकाम कोशिश कर रही थी.
किन्तु वो हालत को बदल न सकी और उसकी स्कर्ट नीचे की ओर हो गयी.

ज़ियारा की पैंटी उस आदमी के मुँह के सामने थी.
तभी उसने एक हाथ से ज़ियारा की पैंटी निकाल कर दूर फेंक दी.

ज़ियारा की अनछुई एकदम चिकनी चुत उसके सामने थी.
नंगी चुत देखते ही आदमी के चेहरे पर अजीब सी चमक आ गई. उसने अपना मुँह एकदम से चुत पर लगाया और किसी कुत्ते की तरह से जीभ से चाटने लगा.

उधर ज़ियारा के पैर अकड़ रहे थे. मगर उस आदमी ने अपनी जीभ नहीं हटाई.

कुछ पल बाद उस आदमी ने अपनी एक उंगली ज़ियारा की गीली हो चुकी चुत में हल्की सी डाली.
ज़ियारा चिल्ला उठी और पता नहीं कैसे, ज़ियारा ने उस आदमी के लंड को पकड़ लिया.

तभी उस आदमी ने एक झटके में अपनी पूरी उंगली चुत के अन्दर घुसेड़ दी और जीभ लगा दी.
पूरी उंगली चुत में घुसी तो ज़ियारा का मुँह एकदम से जैसे ही खुला, उस आदमी ने अपने लंड को आगे को उठा दिया. उसका लंड ज़ियारा के मुँह में चला गया.

उसी वक्त वो आदमी बहुत तेजी से अपनी उंगली को चुत के अन्दर बाहर करने लगा.
उधर उसने ज़ियारा के मुँह को अपने लंड पर कसके दबा दिया था. ज़ियारा के मुँह से गों गों की आवाज आने लगी थी.

कुछ पल ऐसे ही चलने के बाद उस आदमी ने धीमे से ज़ियारा को सीधा किया.

ज़ियारा हांफ़ती हुई बोली- प्लीज अंकल जी, बस करो!
पर वो उसे समझाने लगा- ज़ियारा, लड़की का शरीर तभी खूबसूरती हो पाता है, जब वो सेक्स कर लेती है. तुम अपनी दीदी को देख लो, कितने मस्त भरे हुए बूब्स हैं उसके … और वो दिखने में तुमसे कितनी ज्यादा सेक्सी है.

ये बात मेरी बहन को समझ आ गई थी क्योंकि जो जवान लड़का था, वो ज़ियारा की उस दीदी जैसी सहेली के साथ ही मस्ती कर रहा था.
उसने ज़ियारा की तरफ एक बार भी नहीं देखा था. वो समझने लगी थी कि ये आदमी सही कह रहा है.

ज़ियारा ने फिर से उस आदमी की तरफ देखा और मुस्कुरा दी.

अब उस आदमी ने अचानक से ज़ियारा को गोद में उठाया और उसके होंठों को चूसने लगा.
ज़ियारा कुछ असहज सी हो रही थी.

वो आदमी ज़ियारा के होंठों को खाए जा रहा था.
ज़ियारा बार बार अपना मुँह इधर-उधर कर रही थी.

उस आदमी ने ज़ियारा से कहा- ज़ियारा, मेरी जीभ को चूसो. घबराओ मत, तुम्हें मजा आएगा.
ज़ियारा ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी.
वो आदमी मेरी कमसिन बहन ज़ियारा की जीभ को चूसने लगा.

जीभ चुसवाने से शायद ज़ियारा को अच्छा लगा और वो भी उस आदमी का साथ देने लगी.
अब जैसा जैसा वो आदमी करता जा रहा था, वैसा ही ज़ियारा भी करने लगी थी.

कुछ ही देर में मेरी बहन ज़ियारा को उस आदमी के साथ चूमाचाटी करने में बेहद मजा आने लगा.
वो दोनों जैसे एक दूसरे को खा रहे हों, ऐसे चूम चूस रहे थे.

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि ये मेरी छोटी बहन है या कोई सड़क छाप रंडी है.

जब उस आदमी को लगा कि ज़ियारा उसका कहना मान रही है तो उसने धीरे से उसे सामने लगे बेड पर खड़ा कर दिया और उसके ऊपर का टॉप व समीज उतार दिया.
ज़ियारा एक अनछुई कली की तरह अपने स्तनों को अपने दोनों हाथों से ढकने लगी.
उसके स्तनों पर अभी चूचुक भी सही नहीं उभरे थे.

उस आदमी ने एक हाथ से ज़ियारा के दोनों हाथों को पकड़कर ऊपर उठा दिया और ज़ियारा की बगलों को बारी बारी से चाटने लगा.
इससे ज़ियारा की मादक आहें और सीत्कारें निकलने लगीं.

वो आदमी फिर से अपने एक हाथ से ज़ियारा की बुर को मसलने लगा.
इस बार ज़ियारा ने अपनी टांगें फैला दीं और उससे अपनी बुर रगड़वाने लगी.

वो आदमी मेरी बहन की बुर रगड़ता हुआ अपना मुँह भी काम में लाने लगा.
अब वो धीरे धीरे स्तनों को दबाते हुए कसकर दूध खींचते हुए उन्हें पीने की कोशिश करने लगा.

मेरी बहन ज़ियारा की चूचियां एकदम किसी छोटे छोटे समोसे के जैसी थीं.
उसके निप्पल एकदम छोटे छोटे से थे.

वो आदमी अपने मुँह से ज़ियारा के एक दूध को अपने मुँह में पूरा भर कर उसे चूस रहा था.

कुछ देर बाद उस आदमी ने ज़ियारा को लेटा दिया और उसके दोनों पैर फैला दिए.
अब उसने अपने मुँह में चॉकलेट दबाई और उसे ज़ियारा की बुर पर रगड़ते हुए जीभ से चाटने लगा.

इससे ज़ियारा पागल हो गई थी.
वो अपनी गांड उठा कर अपनी बुर को उस आदमी के मुँह में देने की कोशिश करने लगी थी.

ये एक ऐसी क्रिया होती है जिससे साफ़ समझ आ जाता है कि लड़की अब चुदने को मचल उठी है.
उस आदमी ने भी ये समझ लिया था कि ज़ियारा को अब लंड की जरूरत है.

उसने मेरी बहन के चेहरे के पास लंड को लाकर हिलाया और कहा- ज़ियारा इसे देखो, अब यही तुम्हें प्यार करेगा.
उसने पूछा- कैसे?
उसने कहा- जैसे तुम दीदी के साथ मोबाइल में देखती हो.

ये कहते हुए उसने अपना लंड ज़ियारा के मुँह में फिर से घुसेड़ दिया.
जब उसको दिक्कत होने लगी तो वो अपना लंड मुँह से निकाल कर बेड के किनारे खड़ा हो गया और ज़ियारा को खींच कर उसकी दोनों टांगें फैला दीं.

उस आदमी ने कहा- ज़ियारा, प्लीज जरा सा दर्द होगा, सहन कर लेना.
ये कह कर वो अपने लंड को मेरी बहन की बुर पर रगड़ने लगा.

अचानक से उसने एक झटका मारा और उसके लंड का आगे का भाग ज़ियारा की चुत में फंस गया.
ज़ियारा कसके चिल्लाई और उसने उस आदमी को हटाने का असफल प्रयास किया.
तब तक उसने लंड थोड़ा बाहर निकाल कर पुन: कसके झटका दे मारा.

ज़ियारा की चुत से रक्तस्राव होने लगा.
वो चिल्ला पड़ी.
उसकी तेज आवाज सुनकर दीदी और वो लड़का दोनों अन्दर आ गए.

दीदी उसे देखकर मुस्कराने लगीं.
उसकी मुस्कान बता रही थी कि वो ही ज़ियारा को चुदवाने की कोशिश कर रही थी.

उसने ज़ियारा के बाजू में बैठ कर उसके निप्पल अपनी उंगली से पकड़ कर मसलना शुरू कर दिए, इससे ज़ियारा को कुछ चैन मिलने लगा.

वो आदमी अपनी चुदाई में धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा. कुछ ही देर की पीड़ा के बाद ज़ियारा ने मजा लेना शुरू कर दिया.

करीब दस मिनट बाद ज़ियारा की देसी बुर Xxx ने अपना रस छोड़ दिया और उस आदमी को चुदाई में आसानी होने लगी.
अब वो धकापेल चुत फाड़ने में लग गया.

इस तरह से उस दिन मेरी छोटी बहन ज़ियारा की चुत की सील तोड़ चुदाई हुई.

दोस्तो, इसके बाद भी मेरी बहन ज़ियारा की चुदाई हुई, वो सब आपके मेल मिलने के बाद लिखूंगा.
प्लीज़ आप मेरी देसी बुर Xxx कहानी पर अपने मेल व कमेंट्स जरूर करें.
धन्यवाद.

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