मकान मालकिन और उसकी दो जवान बेटियां

सेक्स होम पोर्न कहानी में पढ़ें कि एक घर में रहने वाली 3 चूत को मैंने बारी बारी से चोदा. पूरा घर ही चुदाई का बाड़ा बन गया था. मुझे चूत की कमी नहीं!

दोस्तो, मेरा नाम अक्षित है. मैं दिल्ली में रहता हूँ और पढ़ाई करता हूँ. इधर मैं एक किराये के मकान में रहता हूँ.

भगवान जब किसी को देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है.
यह कहावत मेरी इस सेक्स होम पोर्न कहानी से आपको चरितार्थ होती समझ आ जाएगी.

मैं एक छोटे से मकान के ऊपर सेकंड फ्लोर पर रहता हूँ.
फर्स्ट फ्लोर और ग्राउंड फ्लोर पर मकान मालकिन और उसकी दो बेटियां रहती है.

मकान मालिक का किसी से चक्कर था, वो उसे अपने साथ लेकर भाग गया था.
वो अब घर नहीं आता है.

मेरी मकान मालकिन का अपना बुटीक है, वो उसे चलाती है. काम चलने के लिए मकान मालकिन का नाम सरला रख लेते हैं.

सरला की दो बेटियां हैं और दोनों की उम्र जवान है. एक की उन्नीस और एक की बीस है.

दोनों जवानी की रस में सराबोर हैं. हुस्न के जलवे हमेशा बिखेरती रहती हैं.
दोनों एक से बढ़कर एक सेक्सी हैं.

मैं तीनों को देखकर और उन्हें चोदने की सोचकर मुठ मारता था पर एक भी चोदने को नहीं मिली.
फिर समय ने करवट बदला और एक एक करके तीनों ही मेरे लंड से चुदवाने लगीं.

मैं आजकल धरती पर ही जन्नत की सैर कर रहा था तो सोचा आज क्यों ना आपको भी अपनी ये कहानी सुना दूँ.

एक दिन की बात है.
उस समय रात के करीब 11 बज रहे थे. उस समय मकान मालकिन सरला आई और बोली- अक्षित जी, आप तो इंजीनियरिंग कर रहे हो. आप मेरी दोनों बेटियों को कुछ रास्ता दिखा दो ताकि वो आगे बढ़ सकें.

मैं उसे इतनी रात को आया देख कर पहले तो चौंक गया.
मगर जब उसने बताया कि मैं खुद भी आपसे दिन में मिलना चाहती थी. आप उस वक्त सोये रहते थे, तो मैंने इसी समय आना उचित समझा.
सरला की बात सुनकर मैं कुछ संयत हुआ.

दरअसल मैं रात को देर तक जाग कर पढ़ाई करता हूँ और सुबह देर तक सोता रहता हूँ.
उस समय मकान मालकिन अपने बुटीक चली जाती है और शाम को वो नौ बजे से पहले घर नहीं आ पाती है.
इसलिए उससे बात नहीं हो पाती है.

मैंने सरला को बिठाया और बातचीत शुरू की.
उसने अपनी बेटियों के लिए कुछ ऐसा बताने का कहा, जिससे वो किसी अच्छे जॉब के लिए आगे बढ़ सकें.

मैंने उसे कोर्स बताए कि ये कर लेने पर उनके लिए आगे काफी स्कोप रहेगा.

पर उन सभी के लिए कोचिंग की जरूरत थी और उसके पास इतने पैसे नहीं थे.
वो बोली- आप ही तैयारी करवा दो. मेरे पास तो पैसे हैं नहीं, आप चाहें तो मेरे साथ …

बस इतना कह कर वो चुप हो गई.
मैं समझ नहीं पाया.
मुझे लगा कि शायद वो अपना दुखड़ा सुना रही थी और अचानक चुप हो गई.

उसके बाद कुछ देर वो चुप रही.
फिर लड़खड़ाती जुबान से आगे खुले शब्दों में सरला बोली- आप चाहें तो मेरी ले सकते हो, मतलब आप चाहें तो रोजाना मेरे साथ रात को सेक्स कर सकते हो.
इतना कह कर उसने अपना आंचल ढलका दिया.

मैं अवाक् रह गया.
पर उसकी कातिल निगाहें और अपने आंचल को ब्लाउज से नीचे गिरा देना, मेरे लिए खुला ऑफर था.

मैं सन्न रह गया.
उसकी आधी चूचियां बाहर आई हुई थीं.

उस पर से सुनहली चैन उसकी दोनों चूचियों के बीच अटकी थी.
सरला गजब माल लग रही थी.
मैं भी उसकी चूचियां देख कर मदहोश हो गया.

मैंने अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए कहा- ठीक है, जैसा आप चाहें. मैं भी अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पाता हूँ. मुझे रात को दो बार मुठ मारना पड़ता है.
मेरी इस बात पर वो हंस दी और हम दोनों हंसने लगे.

वो खुश हो गई और बोली- मैं अभी जाती हूँ. साढ़े ग्यारह बज गए हैं, खाना भी नहीं खाया है. अभी बिगबॉस टेलीकास्ट आ रहा है, मेरी दोनों लड़कियां वही देख रही हैं. मैं खाना खाकर आऊंगी.

दोस्तो, क्या बताऊं मेरी हालात क्या हो रही थी.
मैंने इसके पहले कभी सेक्स नहीं किया था.

मेरी धड़कन तेज होने लगी थी.
मैं पागल हो रहा था, किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था.

बस ऐसा लग रहा था कि क्या सब ठीक रहेगा? कोई दिक्कत तो नहीं होगी? क्या मुझे मकान मालकिन के साथ सम्बन्ध बनाने चाहिए या नहीं? मेरी पढ़ाई पर तो असर नहीं पड़ेगा ना!
ऐसी कई बातें मन में आ रही थीं.

मैंने भी खाना खा लिया और बस किताब लेकर यूं ही बैठ गया.

रात के करीब साढ़े बारह बजे थे.
मेरा दरवाजा अन्दर से बंद नहीं था, दोनों पल्ले सटा दिए थे.

अचानक दरवाजा खुला और सरला अन्दर आ गई.
वो एक पिंक कलर की नाइटी पहनी थी, अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि चूचियां हिल रही थीं और ऊपर से ही निप्पल साफ़ साफ़ पता चल रहे थे.
जब वो चलती थीं, उसकी चूचियां हिलती थीं.

सरला के बाल खुले थे और कमर तक लटक रहे थे. मैडम ने काजल लगाया हुआ था. मुँह कुछ ज्यादा ही गोरा लग रहा था, शायद वो फेसवाश करके आई थी.

आते ही वो मेरे होंठों को चूसने लगीं और मेरी पीठ पर दोनों हाथ फेरने लगीं.
वो मुझे अपनी छाती में सटा लेना चाहती थी.

मुझे अपनी छाती पर उसकी दोनों चूचियां मखमली तकिए की तरह महसूस हो रही थीं.

मैं भी उसके जिस्म को टटोलने लगा, मुझे महीनों की तपिश पिघलती सी महसूस हो रही थी.
उसका एक एक कटाव मेरी कामनाओं को पंख लगा रहा था.

उसके होंठों ने मेरे होंठों पर हमला तेज कर दिया था और मानो मुझे उनके अन्दर घुस जाने का मार्ग मिल गया था.
हम दोनों अब डीप किस करने लगे. वो मेरे मुँह में जीभ डालकर मुझे चूसने लगी.
मुझे मानो मदहोशी सी चढ़ने लगी.

कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ सरला के मुँह में डाल दी और वो मुझसे अपनी जीभ चुसवाने लगी.
इसी तरह से एक छोड़ता तो दूसरा शुरू हो जाता.

फिर अचानक से सरला घूम गई, उसकी गांड मेरे लंड के पास आ गई.

अब उसकी गांड और चूतड़ में लंड रगड़ खा रहा था और वो अपनी गांड लंड पर घिसते हुए दीवानी सी हो रही थी.
अपने हाथ आगे करके मैंने उसके दोनों मम्मों को पकड़ लिया और दबाने लगा.

वो कामुक सिसकारियां लेने लगी. साथ ही मैंने उसकी गर्दन को चूमा तो वो पागल होने लगी और अचानक फिर से मेरी तरफ घूम गई.
उसने अपनी नाइटी को ऊपर से निकाल कर फेंक दिया.

सरला ने अन्दर पैंटी भी नहीं पहनी थी.
उसका नंगा शरीर देखकर मैं पागल हो गया और नीचे से ऊपर तक निहारने लगा.
वो मेरी बांहों में समा गई.

मैंने उसे गोद में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया. मैं उसके बूब्स पीने लगा और धीरे धीरे नीचे को आता गया.

उसने अपने हाथ से मेरे सर को दिशा दे दी और मैं उसकी चिकनी चूत चाटने लगा.

कमरे में उसकी आह आह की आवाज आ रही थी.

मेरी धड़कन तेज हो गई थी पर मैं नर्वस नहीं था.
कुछ देर बाद उसका हाथ मेरे लंड पर आ गया.

मैंने अपने लंड को अनावृत किया और उसके हाथ में पकड़ा दिया.

सरला लंड खींचने लगी, तो मैं समझ गया.

मैंने अपना लंड उसके मुँह में दे दिया, वो आइसक्रीम की तरह मेरे लौड़े को चाटने लगी.

कभी सरला जोर जोर से मुठ मारती और फिर मुँह में ले लेती.
उसकी चूत गीली हो गई थी और वो बार बार गांड उठा कर चूत को अंगड़ाई दिला रही थी. साथ ही वो कातिल निगाहों से लंड को देख रही थी.

उसके बाल गोरे बदन पर बिखर गए थे, मुखड़ा लाल हो गया था, होंठ गुलाबी हो चुके थे, गाल लाल हो गए थे और दोनों चूचियां तन कर टाइट हो गई थीं.
उसने टांगें फैला दीं.

मैं समझ गया कि अब चूत को लंड चाहिए.
मैंने दोनों पैरों को अलग अलग किया और बीच में लंड लगा कर घुसा दिया.

वो सिहर उठी.
मैं जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा.
मेरे धक्के से उसका पूरा शरीर हिल जा रहा था.

हम दोनों लिप लॉक करके जोर जोर से धक्के देने लगे थे.
वो नीचे से, मैं ऊपर से.

सरला काफी प्यासी थी.
पति के बाद शायद चुदती तो थी मगर उसे मेरे जैसे जवान लंड से चुदने का मौक़ा नहीं मिला था.

करीब 20 मिनट चोदने के बाद हम दोनों शांत हो गए.
मैंने भी थैंक्स कहा, उसने भी थैंक्स कहा.
वो नाइटी पहन कर नीचे चली गई.

मुझे उस रात ऐसी नींद आई कि कह नहीं सकता.
सुबह हुई … कॉलेज जा नहीं पाया, क्योंकि उठने में लेट हो गया था.

अब ग्यारह बज रहे थे.
तभी नीचे सरला अपनी बेटी को आवाज दे रही थी- मैं जा रही हूँ. आने में शाम के करीब नौ बज जाएंगे.

उसकी छोटी बेटी भी उसके साथ थी, वो भी उसके साथ जा रही थी.
आज मैडम भी शायद देर से सोकर उठी थी. वैसे वो रोज साढ़े नौ बजे तक निकल जाती थी.

घर में उसकी बड़ी बेटी थी, शायद वो नहा रही थी.
मैंने ब्रेड अंडे खाए और नहाकर रेडी हो गया क्योंकि मुझे प्रोजेक्ट पर काम करना था.

तभी दरवाजा नॉक हुआ.
जाकर देखा तो सरला की बड़ी बेटी लैला खड़ी थी.

वो बोली- अन्दर आ जाऊं?
मैं बोला- हां हां क्यों नहीं, इसमें पूछने की क्या बात है?

वो आ गई और सीधे बोली- मुझे आपसे सेक्स करना है. जैसे आपने मेरी मम्मी को चोदा है, वैसे ही मुझे भी चुदना है. मैं रात को खिड़की से सब देख रही थी. मैं पूरी रात सो नहीं पाई. शायद ऐसा चोदने वाला और नहीं मिलेगा. आप मुझे खुश कर दो.
इतना कह कर वो मेरे सीने से लिपट गई.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भी उसको अपने अंक में भर लिया.
वो अपनी मम्मी से भी गजब चुदक्कड़ माल निकली.

मैं उसकी तरफ देख ही रहा था कि उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया.

जब तक मैं कुछ समझ पाता, उसने मुझे नंगा कर दिया और झट से अपने कपड़े भी उतार दिए.
वो मेरे सामने एकदम नंगी खड़ी थी.

मस्त चूचे एकदम तने हुए मेरे सामने अपने कड़क निप्पलों से मुझे मुँह चिढ़ा रहे थे.
चूत पर झांटें जेट प्लेन की डिजायन के आकार में सजा कर काटी गई थीं.

उसने चूत पर हथेली फेरी और कहा- मैं कैसी लगी?
मैंने उठ कर उसे दबोचा और कहा- अभी चख कर बताता हूँ कि मम्मी मस्त थी या मम्मी की लौंडिया मस्त है.

वो हंस दी और हम दोनों गुत्थम गुत्था हो गए.
कड़क और कसी हुई चूत चोदकर सच में मजा आ गया था.

लैला कुछ ज्यादा ही कमीनी निकली. उसके चुदने का स्टाइल अलग ही था. वो सनी लियोनी की तरह चुदना चाहती थी.
मैंने भी उसे अलग अलग स्टाइल में तीन बार चोदा.

दूसरे दिन से उनकी छोटी बेटी मेरे पास पढ़ने आने लगी.
वो मुझे देखती तो थी मगर रांड नहीं थी.

हालांकि मैं जरा सा चुग्गा डाला तो वो भी मेरे लंड के नीचे आने को राजी हो गई.

मैंने एक दिन उसको भी चोद दिया.

बड़ी बहन और मां दोनों मुझे चोदने के लिए बोली थीं पर छोटी को मैंने खुद चुदने के लिए मनाया.
अब मैं तीनों को चोदता हूँ.

इस सेक्स होम में मेरे दिन तो गजब के चल रहे हैं.
तीन तरह की चूत, तीन तरह के शरीर की बनावट, तीन उम्र, तीन तरह की चूचियां, होंठ, लाल गाल, भरी गांड, कौन ऐसा खुशनसीब है, जिसको ऐसा मिलेगा.

अब तक मैंने दोनों बहनों को तो एक साथ चोद लिया है, बस उनकी मम्मी भी साथ में चुदने को राजी हो जाए तो उनकी एक साथ की चुदाई की कहानी आपको सुनाऊंगा.
आपको यह सेक्स होम पोर्न कहानी कैसी लगी?
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