भाभी और उनकी सहेली के साथ सेक्स

इंडियन भाभी पोर्न स्टोरी में मैंने अपने पड़ोस की भाभी से दोस्ती के बाद चुदाई की पहली घटना को बताया है. भाभी ने अपनी चुदाई के बाद अपनी सहेली को भी मेरे नीचे लिटा दिया था.

मेरा नाम रिन्कू है, मैं बरेली जिला का रहने वाला हूँ.
मैं देखने में ठीक-ठाक हूँ. मेरी लम्बाई लगभग 5 फीट 10 इंच है.

आज मैं एक सेक्स स्टोरी सुना रहा हूँ. ये इंडियन भाभी पोर्न स्टोरी मेरी एक पड़ोसन भाभी की है.

शुरू शुरू में मैं उनको भाभी बोलता था और उनके पति से मेरी दोस्ती थी, इसी वजह से उनके घर मेरा आना-जाना शुरू हो गया था.

मैं जब भी उनके घर जाता, तो हमारे बीच बातें हो जाती थीं, किसी न किसी काम में मैं उनका साथ दे देता था.
किचन में खाना बनाते समय मैं कुछ काम कर देता था या बाजार से कुछ लाना हो तो ला देता था.

मेरे ऊपर उनके पति विश्वास करते थे क्योंकि मैं उनके पति के विश्वास पर कई बार खरा उतरा था.
भाभी के साथ मेरी बातें बढ़ना शुरू हुईं तो हमारे बीच आत्मीयता बढ़ने लगी थी.

ऐसे ही हम दोनों मोबाइल पर भी बात करने लगे थे.
मैं भाभी के साथ चैट भी करने लगा था, उन्हें फ़नी जोक भेजता रहता था.

भाभी से मेरी फोन पर बातें बढ़ने लगी थीं. अब तो ऐसा हो गया था कि टाइम का कुछ पता ही नहीं चलता था कि हमें बातचीत करते हुए कितना टाइम हो गया.

फिर हम दोनों की चैट में एडल्ट जोक आना शुरू हो गए.
भाभी भी मजे से मेरे जोक को लेकर मुझसे बात करतीं.

इसी तरह से बातों ही बातों में हम दोनों खुलते चले गए और सेक्स भी हमारी बातचीत का हिस्सा बन गया.

भाभी के पति के साथ उनकी सेक्स लाइफ कैसी चल रही है, ये बातें भी होने लगी थीं.
एक बार जब सेक्स के टॉपिक को लेकर हम दोनों ने चर्चा की तो बस यूं समझो कि हमारे बीच की सारी झिझक मिट गई और खुली खुली बातों में लंड चूत चुदाई जैसे शब्द खुल कर इस्तेमाल किए जाने लगे.

अब तो हम दोनों एक दूसरे से फोन सेक्स चैट औऱ वीडियो कॉल भी करने लगे.
भाभी मुझे रात को कमरे में हल्की रोशनी में मुझे अपने दूध दिखा देतीं और मैं उन्हें अपना लंड दिखा देता.

वो मेरे लंड के सुपारे की लालिमा देख कर अपनी जीभ को होंठों पर फिरा देती थीं.
हम दोनों को एक दूसरे पर विश्वास था, इसलिए एक दूसरे की बातें हमारे बीच तक ही सीमित रहती थीं.

एक दिन ऐसे ही वीडियो कॉल पर बात करते हुए मैंने उनसे कहा- भाभी क्या बात है, आज आपके दूध बहुत मस्त और हॉट लग रहे हैं. ऐसा लग रहा है जैसे कई दिन से खाली नहीं किए हैं.
भाभी बोलीं- कहां यार … अब मेरे मम्मों में वो बात नहीं है. अब मेरे तीन बच्चे हो गए हैं.

मैंने कहा- अरे भाभी, अभी भी आप 22 साल वाली को भी हरा दोगी. आपको देख कर आज भी भाईसाब का लंड खड़ा हो जाता होगा.
भाभी हंसने लगीं और ठंडी आह भर कर बोलीं- यही तो रोना है यार, तुम्हारे भाईसाब का लंड खड़ा नहीं होता है.

मैंने कहा- चूस दिया करो. खड़ा हो जाएगा और आपकी चूत की सर्विस हो जाया करेगी.
भाभी हंसने लगीं- अरे चूस कर भी देख लिया, उनका लंड मेरे मुँह में ही रोने लगता है. वो चूत तक जा ही नहीं पाता.

मैं हंस कर कह देता कि अब तो आपको मेरे लंड का ही सहारा बचा है. किसी दिन बुलाओ खटिया पर … मैं आपकी सेवा कर दूँगा.
भाभी भी हंस कर हामी भर देतीं.

इस तरह भाभी और मुझे हम दोनों को एक दूसरे की एक तरह से लत सी लग गयी थी.
साथ ही हमारे बीच तय हो गया था कि हमारे बीच चुदाई होनी चाहिए. हम दोनों ही अपनी आग को ठंडा करना चाहते थे.

एक दिन हम ऐसे ही बात कर रहे थे.
भाभी उदास थीं.

मैंने मज़ाक में कहा- भाभी जी, क्या बात है, रात में बहुत ज्यादा इंजेक्शन लग गए हैं क्या, बड़ी उदास दिख रही हो, क्या हुआ ऐसा?

भाभी फोन पर ही रोने लगीं.
वो बोलीं- आज दो महीने हो गए हैं, उनसे बात किए बिना, वो मुझे समय ही नहीं देते हैं … औऱ न ही उनका खड़ा होता है. इस पर तुम सेक्स की बात कर रहे हो.

मैंने कहा- भाभी जी, आपका देवर किस काम आएगा, आप एक बार मौका देकर तो देखो.
भाभी बोलीं- रहने दो … कोई भी साथ नहीं देता है, सब दूर से ऐसे ही बोल देते हैं.

मैंने कहा- आप एक बार बोलो तो यार!
भाभी ने कहा- क्या सच में तुम मेरे लिए कुछ कर सकते हो?

मैंने कहा- हां, मैं आपके लिए आगे पीछे सब जगह से सेवा करने के लिए रेडी हूँ.
भाभी ने कहा- ठीक है, पीछे की बात तो मैं नहीं करती, लेकिन आगे की तुम्हें जल्द ही बताती हूँ.

फिर दो दिन बाद भाभी का फोन आया कि आज मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ. अगर तुम्हें मुझसे मिलना है, तो उधर ही आ जाओ.
मैंने कहा- जी, अभी आता हूँ.

मुझे भाभी की सहेली के घर का मालूम था कि वो किधर रहती हैं.
मैं बाइक से भाभी की सहेली के घर आ गया. वहां पर भाभी और उसकी सहेली बैठी थीं.

भाभी की सहेली ने मुझे देख कर स्माइल दी और मुझे बिठा कर पानी दिया.

कुछ पल बाद मैंने भाभी को देखा तो उनकी सहेली ने समझते हुए कहा- तुम दोनों लोग अलग कमरे में चले जाओ, वहां बात कर लो.

मैंने ओके कहा और भाभी की सहेली उनको एक दूसरे कमरे में ले गईं.
मैं भी उन दोनों के पीछे पीछे चला गया.

उधर हम दोनों को कमरे में छोड़ कर वो चली गईं.

हम दोनों उधर पलंग पर बैठ गए और ऐसे ही बात करने लगे.

भाभी गज़ब की माल लग रही थीं.
मैंने कहा- क्या बात है भाभी, आज ऐसा लग रहा है कि आपको खा जाऊं.

भाभी बोली- तो तुम्हें किसने रोका है, खा लो. तुम ही दूर बैठे हो, फोन पर तो बहुत खुल कर बात करते हो और सामने हो, तो दूर दूर हो.
मैं ये सुनकर भाभी के पास आ गया और उनको अपनी बांहों में ले लिया.

भाभी भी मेरी बांहों में समा गईं और मैंने उन्हें जोर से अपनी जकड़ में कस लिया.
धीरे धीरे हम दोनों एक दूसरे के होंठों से जुड़ गए. हम दोनों के बीच चूमाचाटी का दौर चलने लगा, हमारी जीभें आपस में लड़ने लगीं.

बदन से कपड़े कब निकल गए, कुछ अहसास ही नहीं हुआ.
मैंने भाभी का सूट निकाल कर उनकी ब्रा से उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया.

भाभी के मस्त भरे हुए मम्मों को मैं अपने होंठों में लेकर चूसने लगा, उनकी चूची के निप्पल को अपने होंठों से दबा कर मैंने सारा रस निकाल लिया.
मैंने भाभी को ऐसा मस्त कर दिया था कि उनके हाथ खुद ही चलने लगे.

उन्होंने मेरे लंड को हाथ में ले लिया और बोली- यह तो बहुत बड़ा है.
मैंने कहा- आज आपका असली वाला सुहागदिन होगा … और आपकी सील भी टूट जाएगी.

वो इठला कर बोलीं- देखते हैं, अब बात ही करते रहोगे, या कुछ करोगे भी?
भाभी सेक्स की आदी थीं मगर मैं अभी उसके लिए एक नया माल था.

मैंने भाभी से मुँह में लंड लेने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया, मुँह में लंड नहीं लिया.

वो मुख मैथुन से परहेज करती थीं. उन्होंने मुझसे अपनी चूत पर मुँह भी बहुत कम लगवाया था.

मगर मैंने उससे कहा- यदि हमारे अंग साफ़ सुथरे होंगे, तो उन्हें मुँह में लेने में कुछ भी गलत नहीं है.

मेरे काफी समझाने पर भाभी इस बात के लिए राजी हो गईं.
मैंने धीरे धीरे उन्हें बहुत सारा प्यार दिया.

मेरा प्यार देख कर भाभी धीरे धीरे मेरे लंड को भी अपने मुँह में भी लेने लगीं.
मैंने भी उनकी चूत चाट कर बहुत गीली की.

उसके बाद भाभी बोलीं- अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा है. मुझे जल्दी से चोद दो.

मैंने सबसे पहले उन्हें चित लिटाया और उनकी टांगें फैला कर चूत में लंड रगड़ दिया.
भाभी ने अपनी टांगें हवा में उठा लीं और लंड लेने के लिए अपनी गांड उठा दी.
मैंने भी जल्दी से लंड ठूंस दिया.

हम दोनों की एक साथ आह निकल गई.
मेरे लंड का धागा टूट गया था और भाभी की प्यासी चूत को मेरे मोटे लंड ने चीर दिया था.

जल्द ही सब कुछ सामान्य हो गया और धकापेल चुदाई चलने लगी.
पहली बार में तो मैं शायद 4-5 मिनट में ही धराशायी हो गया था.

पर अगले दो घंटे तक चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा, जिसमें हम दोनों ने तीन बार चुदाई का सुख लिया था.
ऐसा कोई आसन नहीं बचा था, जो हम दोनों ने नहीं किया हो.

मैंने उनको खड़े होकर, गोद में लेकर, घोड़ी बना कर लंड की सवारी भी करवाई.
बेड से उतर कर खड़े होकर उनको गोद में लेकर लंड चूत में देकर उनकी मस्त चुदाई की.

तीन बच्चों की मां में बहुत सेक्स भरा हुआ था.

जब मेरा लंड उनकी चूत की खुदाई कर रहा था तो उनकी चूत से थोड़ा खून निकल गया था. पता नहीं यह मेरे लंड का खून था या भाभी की चूत का!
जब भाभी को मैंने उनकी चूत के खून को दिखाया, तो वो बहुत खुश हो गईं और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

भाभी बोलीं- आज से मेरी चूत पर तुम्हारा नाम भी लिख गया है. जब भी मौका मिले, बजा देना इसे. आज से इसके पति तुम भी हो गए हो.
शादी के बाद आज सही तरह से सेक्स करके भाभी बहुत खुश थीं.

उनको आज पता चला था कि सही में सेक्स का मजा क्या होता है.
मेरे साथ भाभी ने बहुत इंजॉय किया. हम दोनों के शरीर पर अभी भी एक भी कपड़ा नहीं था.

कुछ देर बाद भाभी बोलीं- आज सच में तुमने मुझे जिंदगी का सबसे अच्छा पल दिया है. चुदाई क्या होती है, लंड क्या होता है, मैंने वो जाना.
मैंने कहा- अभी आपको बहुत सालों की चुदाई का सुख पूरा करना बाकी है.

वो मेरी बात सुनकर बहुत खुश हुईं.

बाद में मैं भाभी से बोला- और कोई ख्वाहिश है तो बताओ?
वो बोलीं- जिसके घर में हम दोनों ने इतना मजा लिया है, उसको भी कुछ प्रसाद दे दो.

मैं समझ गया और भाभी से कहा कि अपनी सहेली को भी अन्दर बुला लो.
उन्होंने अपनी सहेली को बुलाया और खुद बाहर चली गईं.

मैंने उनकी सहेली को भी नंगी करके पेल दिया.
चुदाई के बाद हम तीनों बैठ कर चाय पी रहे थे.

भाभी बोलीं- हम दोनों अब से किसी औऱ से तुमको शेयर नहीं करेंगी, तुम सिर्फ हम दोनों के हो और तुम्हारा लंड हम दोनों की चूत का है.
उनके चेहरे की स्माइल औऱ खुशी देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा कि सच में मैं चुदाई से किसी को भी खुश कर सकता हूँ.

अब जब भी हम तीनों मिलते हैं. मस्त चुदाई करते हैं.

उस दिन की चुदाई से भाभी की चूत कई दिन तक दर्द करती रही थी और वो कुछ करने नहीं दे रही थीं.
मगर आज भी हम साथ हैं औऱ एक दूसरे पर विश्वास भी है. हम बहुत इंजॉय करते हैं.

जब तक भाभी की चुदाई होती है, उनके होंठ मुझे चूमने का ही काम करते हैं.
इंडियन भाभी पोर्न का मजा लेती हुई मुझसे मस्त चुदवाती हैं.
उस वक्त उनकी सहेली बाहर ही हमारे निकलने का इतंज़ार करती है.

मैं एक एक करके ही उन दोनों को चोदता हूँ.

अभी तक उन दोनों ने मुझे चूत ही दी है. अभी उनकी गांड की सील की भी ओपन करना है, पर वो दोनों ही मना करती हैं.
पर मुझे मालूम है कि हार के आगे जीत है.

दोस्तो, मेरे पास बहुत सारी सेक्स कहानी लिखने को हैं, वो आगे आपके साथ शेयर करूंगा.

प्यारे पाठक पाठिकाओ, आप मुझसे मेरी ईमेल पर संपर्क करके बता सकते हैं कि आपको यह इंडियन भाभी पोर्न स्टोरी कैसी लगी?
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