भानजी के पति ने मुझे चोद दिया- 2

हॉट ओपन सेक्स की कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरी भानजी ने मुझे उसके पति के लंड से चुदवा दिया. भानजी के पति में मेरे तीनों छेदों में लंड डाल कर माल भरा.

दोस्तो, मैं शीला आपको अपनी जवान चूत की चुदाई की कहानी सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
भानजी ने मुझे नंगी करवा दिया
में अब तक आपने पढ़ा था कि अमर मेरी चुदाई के लिए गर्मा गया था और वो मेरी चूत का भोसड़ा बना देने की बात कर रहा था.

अब आगे हॉट ओपन सेक्स की कहानी:

मैं तब तक बाथरूम में अपना मुँह धोकर आ गई.
अब मैं भी अमर के साथ खुलकर बात करने लगी, उसने एक सिगरेट जलाई और पीने लगा.

डॉली ने भी उसके हाथ से सिगरेट को लेकर एक दो कश लगाए और मुझसे बोली- मौसी, तुम भी सिगरेट पी लो, मजा आएगा.

मैंने भी एक दो बार खींची. मुझे खांसी आने लगी.

डॉली अब फिर से अमर का लंड चूसने लगी.
थोड़ी ही देर में उसका लंड पूरा कड़क हो गया था.

डॉली बोली- मौसी, तुम भी चूसो.
मैं अमर के लंड को पकड़ कर चूसने लगी.

मेरी चूत में फिर से ओपन सेक्स का कीड़ा काटने लगा.
मैंने अपनी एक हथेली अपनी पैंटी में घुसा ली.

यह देखकर डॉली ने मेरी पैंटी नीचे खींच दी.
मेरी चूत देखकर बोली- मौसी, आपकी चूत तो एकदम सफाचट है.

वह मेरी चूत चाटने लगी.
मेरी चूत में आग लग गई.

मैं अपनी चूत उठाने लगी.
यह देखकर अमर ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया और मुझे पीठ के बल लिटा दिया.

मेरे चित लेटते ही उसने अपने लंड को चूत पर रखा और रगड़ने लगा.

मेरी फुद्दी में तो आग लगी ही थी, मैं कसमसाती हुई बोली- अमर अब सहा नहीं जाता, तुम अब लंड घुसा दो!
वह बोला- मौसी, अभी तो शुरुआत भी नहीं हुई है और तुम व्याकुल हो रही हो.
मैं कुछ नहीं बोली.

वह मेरी चूत पर लंड घिस रहा था, कभी कभी सुपारा अन्दर घुसाता और निकाल लेता.
मुझे बहुत बैचेनी हो रही थी.

मैंने उसके लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर रख लिया और नीचे से कमर उठा दी.
उसका लंड थोड़ा सा अन्दर घुस गया था क्योंकि लंड बहुत ज्यादा मोटा था इसलिए थोड़ा दर्द भी हो रहा था.

इसी बीच अमर ने एक जोरदार धक्का लगा दिया.
उसका लंड मेरी चूत को चीरता अन्दर घुसने लगा.
मैं बहुत जोर से आह ओह करने लगी.

डॉली बोली- मौसी, ज्यादा जोर से मत चिल्लाओ, नहीं तो हॉल के लोग आ जाएंगे और हम लोग मुसीबत में पड़ जाएंगे.

अमर अपने लंड को आगे पीछे करने लगा.
थोड़ी देर में मुझे भी मजा आने लगा.

मुझे मजा लेते देखकर अमर ने फिर से एक शॉट लगा दिया.
उसका लंड और अन्दर घुस गया.

मैं दर्द के मारे अपने हाथ पैर पटकने लगी और बोली- अमर, थोड़ा आराम से चोदो.
मैं उसके लंड को टटोलने लगी तो लगा कि उसका लंड अभी भी चार इंच बाकी है.

डॉली ने पूछा- मौसा जी का लंड नहीं लेती हो क्या … जो इतना चिल्ला रही हो?
मैं बोली- तुम्हारे मौसा जी का इतना बड़ा लंड नहीं है.

डॉली बोली- मौसी, बड़े लंड का मजा कुछ और ही है. दर्द तो होता है लेकिन मजा भी बहुत आता है और बार बार घुसवाने का मन करता है.

डॉली यह बोल ही रही थी कि अमर ने अपना लंड कुछ बाहर निकाला और फिर से कसकर धक्का लगा दिया.

मैं जोर से चिल्ला उठी और बोल पड़ी- उई मम्मी मर गई, साली डॉली … तूने मरवा दिया … आंह कुतिया मरवा दिया!

डॉली ने मेरे मुँह को अपने हाथ से बंद कर दिया.
मैं गूं गूं करने लगी.

अमर थोड़ी देर उसी तरह पड़ा रहा.
मुझे कुछ राहत हुई, तो वो अपना पिस्टन फिर से चलाने लगा.

उसका लंड मेरी चूत को घिस घिस कर आने जाने लगा.
मेरी चूत में जलन होने लगी.

मेरे मुँह से आह ओह ओह निकलने लगा.
धीरे धीरे मुझे भी मजा आने लगा.

डॉली मेरी चूची को चूसने लगी.
मुझे और मजा आने लगा और मैं अपनी कमर को ऊपर उठाने लगी.

बस फिर क्या था, अमर जोर जोर से धक्का मारने लगा.
मेरे मुँह से आह आह ओह निकल रहा था.

अमर बोला- भोसड़ी वाली मौसी, तेरी चूत का आज कचूमर निकाल दूंगा. तू याद करेगी कि ऐसा लंड मिला.
मैं भी बोली- अमर, और जोर से चोदो … मादरचोद साले और जोर से चोद!

अमर और जोर से धक्का मारने लगा.
मेरी चूत में जलन होने लगी.

मैं सोच रही थी कि अमर जल्दी झड़ जाएगा लेकिन यह तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था.
उसे चोदते हुए करीब आधा घंटा हो गया था.

मेरी चूत से दो बार पानी निकल चुका था. मेरी हिम्मत जवाब दे गई थी.

मैं बोली- अमर अब कितनी देर लगाओगे?
डॉली बोली- मौसी हार मान गई अमर … जल्दी करो.

लेकिन अमर पर कुछ असर नहीं पड़ा, वह पागल सांड के जैसे चोदता ही जा रहा था.

मैं बोली- अमर, मैं अब ऊपर आ जाती हूं.
अमर नीचे पलट गया और मैं उसके ऊपर आ गई.

अब मैं धक्का लगाने लगी.
अमर मेरी चूची को पकड़कर नीचे से भी धक्का लगा रहा था.
थोड़ी देर बाद मैं फिर से झड़ गई.

वह था कि साला थकने का नाम नहीं ले रहा था.
मैं रुआंसी होकर बोली- अमर, अब छोड़ दो.

यह सुनकर अमर और तेज तेज धक्का मारने लगा और अपना रस मेरी चूत में भर दिया.
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया.

थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से उठी और बेड पर लेट गई.
अमर फिर से सिगरेट सुलगा कर पीने लगा.
साथ में डॉली भी पी रही थी.

अमर बोला- डॉली, कुछ खाने का है?
वो बोली- हां थोड़े काजू फ्राई हैं.

वह निकाल कर ले आई.
हम तीनों लोग खाने लगे.

डॉली अमर से बोली- अमर, मुझे भी मजा लेना है.
अमर बोला- मैं कहां मना कर रहा हूं?

अब डॉली मुझे अपनी सुहागरात की बात सुनाने लगी कि अमर ने कैसे उस रात पांच बार चोदा था कि वो दूसरे दिन खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. मेरी बड़ी ननद ने कैसे मेरी चूत की सिकाई की.

इसी सब बात के बीच डॉली अमर का लंड भी सहला रही थी.
करीब आधे घंटे बाद उसका लंड फिर खड़ा हो गया था.

डॉली लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं यह देख रही थी.

तभी डॉली डॉगी स्टाइल में आ गई.
अमर ने अपना लंड डॉली की चूत में पीछे से घुसा दिया और धक्का लगाने लगा.

डॉली बोली- मौसी, इस प्रकार से मौसा जी से कभी चुदाई करवाई है?
मैं बोली- हां एक दो बार. इसमें तुम्हारे मौसा जी जल्दी झड़ जाते हैं.

डॉली बोली- अमर से चुदवाकर देखो मजा आ जाएगा.
मुझे भी उसकी चुदाई देखकर मेरी चूत में खुजली होने लगी.

थोड़ी देर बाद मैं भी बेशर्म होकर बोली- डॉली तुम हटो … मुझे अमर से चुदवाना है.

अमर ने अपना लंड डॉली की चूत से निकाल लिया और मुझे घोड़ी बनने को बोला.
मैं तुरत घोड़ी बन गई.

अमर ने मेरे पीछे आकर मेरी चूत पर अपना लंड सैट किया और धक्का लगा दिया.
उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता अन्दर घुस गया था.

मैं आगे भागने की कोशिश कर रही थी लेकिन अमर मेरी कमर को पकड़ कर पीछे खींच लेता जिससे मैं आगे जा नहीं पा रही थी.
मेरे मुँह से आह ओह की आवाज निकल रही थी.

मैं कुछ बोल पाती कि इससे पहले अमर ने एक बमपिलाट धक्का मार दिया.
मेरे मुँह से जोर की आवाज निकल गई.

डॉली बगल में मुस्कुरा रही थी.
वह बोली- मौसी तुम्हारी चूत का कचूमर निकल जाएगा.

अमर अब अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा था.
उसके हर धक्के पर मेरी अंतड़ियों में दर्द होने लगा था लेकिन मजा भी आ रहा था.

वह बहुत देर से चोदे जा रहा था.
मैं थक गई थी, मैं बोली- अमर अब मैं नीचे आ जाती हूं.

तब मैं नीचे पीठ के बल लेट गई.
अमर ने फिर मेरी चुदाई शुरू कर दी.

मेरी चूत में जलन होने लगी थी; ऐसा लग रहा था मानो किसी ने लाल मिर्च का पॉडर लगा कर लंड पेल दिया हो.

मैं ‘आह ओह माई मर गई …’ बोलने लगी थी.
इस बीच मैं दो बार झड़ चुकी थी.

मैं अमर को धकेलने लगी … लेकिन अमर था कि मुझे कसकर जकड़े था और धक्के लगाए जा रहा था.
करीब आधे घंटे बाद उसके कामरस ने मेरी चूत को भर दिया और वह मेरे ऊपर लेट गया.

थोड़ी देर बाद वह मेरे ऊपर से हट गया.
मैंने देखा कि रात के तीन बजे का समय हो रहा था.

मैंने डॉली से कहा- मैं अब हॉल में जाती हूं, किसी ने अगर देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी.

मैं अपनी पैंटी और ब्रा पहन रही थी कि डॉली ने मुझे पकड़ कर बिठा लिया और बोली- मौसी, अभी भी सुबह होने में दो घंटा बाकी हैं.
अमर भी जिद करने लगा- मौसी, अभी सुबह तक रुक जाइए, कुछ नहीं होगा. मैं आराम से आपको छोड़ दूंगा.

मेरा भी मन हो रहा था कि अमर तो मस्त चुदाई करता है. न जाने फिर कब मौका मिलेगा या न भी मिले.
मैं भी रुक गई.

हम तीनों आराम करने लगे.
मेरे और डॉली के बीच में अमर था.

अमर बोला- कुछ दूध हो जाए तो मजा आ जाएगा.

डॉली बोली- बहनचोद दो दो दूध वाली हैं और फिर भी तुम्हें दूध चाहिए.
यह बोलकर उसने अपनी चूची अमर के मुँह में डाल दी.
अमर भी धीरे धीरे चूसने लगा.

वह कभी डॉली की चूची चूसता, तो कभी मेरी.
मेरी जब चूस रहा था तो उसने कहा- मौसी आपके चूचे बहुत मस्त हैं. मन करता है कि हमेशा ही चूसता रहूँ.

मैं बोली- तो तुम्हें कौन रोक रहा है.
वो एक हाथ मेरी चूत को भी सहला रहा था.

इतनी चुदाई के बाद भी मेरे अन्दर फिर से आग लगना शुरू हो गई.
करीब आधा घंटा बाद उसका लंड भी खड़ा होना शुरू हो गया था.

मैं उसके लंड को सहलाने लगी.
उसका लंड कड़क हो गया था.

मैं 69 की पोजीशन में आ गई और उसके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

अमर भी मेरी चूत को छोड़कर मेरी गांड को सहलाने लगा.
वो बीच बीच में मेरी गांड के सुराख को भी चाटने लगा.

इससे मेरी गांड में सुरसुराहट होने लगी. मैं समझ गई कि यह अमर का बच्चा अब मेरी गांड भी मारेगा.

मैं बोली- अमर, यह क्या कर रहे हो?
वह बोला- कुछ नहीं मौसी, सिर्फ तुम्हारे पीछे वाले छेद को देख रहा था.

इसी बीच उसने एक उंगली मेरी गांड में डाल दी.
मैं दर्द से आगे को हो गई.
उसकी उंगली छेद से बाहर निकल गई.

डॉली बोली- मौसी, अमर बड़े अच्छे ढंग से गांड की चुदाई करता है.
मैं बोली- नहीं बाबा, इसका तो ऐसे ही मूसल जैसा लंड है. वह मेरी गांड को फाड़ देगा.
वह बोली- मौसी, पहली बार थोड़ा दर्द होता है लेकिन मजा भी बहुत आता है.

अमर ने मुझे पेट के बल लिटा दिया.

मैं कोशिश कर रही थी कि मैं औंधी न होऊं लेकिन अमर इतना तगड़ा था कि उसने मुझे एक झटके में उल्टा कर दिया.

अब वह मेरे चूतड़ों को अपनी जीभ से चाटने लगा और मेरे दोनों चूतड़ों को फैलाकर गांड को भी चाटने लगा.
मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था तो मैं भी मूड बनाने लगी.

इसी बीच डॉली अपने पर्स से क्रीम निकाल कर ले आई.
अमर ने अपनी उंगली में क्रीम लगाकर फिर से मेरी गांड में घुसा दी.

मुझे फिर से दर्द होने लगा लेकिन मैं कर भी कुछ नहीं पा रही थी.

अमर क्रीम मेरी गांड में लगाने लगा.
अब मुझे भी थोड़ा मजा मिल रहा था.

अमर ने कुछ इशारा किया और डॉली एक तकिया ले आई और उसने मेरी चूत के नीचे रख दिया जिससे मेरी गांड ऊपर उठ गई.

वह अपने लंड को मेरी गांड पर घिस रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

इसी बीच उसने एकाएक अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया.
मैं चिल्ला उठी- उई मम्मी … मर गई

डॉली बोली- बहन की लौड़ी चुप रह … लोग सुन लेंगे.
मैं उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन अमर इतना तगड़ा था कि उसने मुझे उठने ही नहीं दिया.

उसने दुबारा से कसकर धक्का लगा दिया.
उसका आधा से अधिक लंड घुस चुका था.

मैं चिल्ला रही थी- ओह ओह ओह … माई री मर गई. उई डॉली कुतिया मुझे फंसा दिया.

अमर चुपचाप अपने लंड को उसी तरह रखे रहा.
जब उसको लगा कि मुझे कुछ राहत हुई है तो उसने फिर से कस कर धक्का लगा दिया और उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुस चुका था.

‘आह आह … माई री मर गई … आह आह मार दिया … मेरी गांड फाड़ दी … आह.’
मैं दर्द से कराह रही थी लेकिन अमर पर कुछ असर नहीं हो रहा था.

डॉली बोली- मौसी अब पूरा घुस चुका है, अब बस मजा मिलेगा.
मैं बोली- साली, तुमने मुझको मरवा दिया.
दर्द से तड़फ रही थी मैं!

थोड़ी देर बाद मेरी गांड में सुरसुराहट होने लगी थी, मेरी आवाज कम होती गई.
अमर ने फिर से अपना पिस्टन थोड़ा निकाला और आगे पीछे करने लगा.

मेरी गांड में लग रहा था कि कोई मिर्ची रगड़ रहा है.
मैं कुछ कर भी नहीं पा रही थी क्योंकि उसका वजन भी काफी था.

साली डॉली मेरी चूची चूसने में लगी थी.
मुझे थोड़ी देर बाद कुछ राहत हुई.

अमर अपना लंड मेरे गांड में आगे पीछे किए जा रहा था.

एकाएक उसका लंड बहुत कड़ा हो गया और वह मुझसे चिपट गया.
इसी बीच उसके लंड ने मेरी गांड में पानी भर दिया.

चार पांच मिनट बाद अमर ने अपना लंड निकाल लिया और एक तरफ उलट गया.
मैं उसी तरह पड़ी रही.

डॉली बोली- मौसी, मजा आया ना हॉट ओपन सेक्स करके?
मैं कुछ नहीं बोली लेकिन उसको कस कर किस करके उससे लिपट गई.

मैं बोली- कितना समय हुआ?
वह मोबाइल में देखकर बोली- पांच बज रहे हैं.
मैं बोली- मुझे अब जाना है.

अमर कपड़े पहनकर बाहर हॉल में गया और वापस आकर कहा- सब लोग अभी सो रहे हैं.
मैंने अपनी पैंटी और ब्रा पहन ली और नाइटी डाल कर हॉल में अपनी जगह पर जाकर सो गई.

सुबह मैं देर तक सोती रही थी.
सब लोग जाग चुके थे.

मेरी बहन सोनी बोली- ओ शीला, उठ आठ बज गये हैं.
मैं बोली- थोड़ा देर और सोने दो.

मैं एक घंटे बाद उठी और बाथरूम में घुस गई.
मुझे पॉटी करने में दर्द होने लगा लेकिन सोच सोच कर मुस्कुरा रही थी और मन में सोच रही थी कि असल चुदाई यही है.

मेरी हॉट ओपन सेक्स की कहानी कैसी लगी, कमेंट जरूर करें.
उम्मीद करती हूं कि लंड वालों के लंड से पानी और चूत वालियों की चूत से पानी निकल रहा होगा.
आपकी शीला
[email protected]

लेखक की पिछली कहानी थी: भतीजी के घर में घमासान

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