ठाकुर जमींदार ने ससुराल में की मस्ती- 8

Xxx देसी चूत चुदाई कहानी में पढ़ें कि जब मैं मजदूर की बीवी को चोद रहा था तो उसकी पड़ोसन ने देख लिया और वो अपनी चूत खुजाने लगी. मैंने उसकी भी चूत गांड मारी.

नमस्ते दोस्तो,
कहानी के पिछले भाग
गाँव की मजदूर औरत को चोदा
में अभी तक आपने पढ़ा था कि ठाकुर ने यानि मैंने अनीता को कैसे ठोका था.
अनीता की चूत लेने के बाद मैं खटिया पर बैठ गया था.

तभी मेरी नजर दरवाजे पर पड़ी, एक जवान औरत हमारी चुदाई का नजारा देखने के लिए दरवाजे पर खड़ी थी.
अनीता को चोदने के चक्कर में मैंने दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था.

वो भी चुदाई देख कर गर्म हो चुकी थी और आंखें बंद करके अपनी चूत को उंगली से कुरेद रही थी.
मैंने झट से जाकर उसको धर दबोचा और अन्दर लाकर दरवाजा बंद कर दिया.

उसे देख कर अनीता भी डर गयी और अब वो औरत भी डर रही थी. क्योंकि मैं ठाकुर का दामाद था और वो रंगे हाथों पकड़ी गयी थी.

वो औरत अनीता की पड़ोसन निम्मी थी.
मैंने उसे भी चोदने का मन बना लिया मगर आपको मालूम है कि जब तक चूत चुदने को राजी न हो तब तक मैं नहीं चोदता हूँ.

अब आगे Xxx देसी चूत चुदाई कहानी:

मैंने उससे पूछा- कौन है तू?
मेरी कड़क आवाज सुनकर वो कुछ नहीं बोली, बस नीचे देखती रही.

मैंने गौर से देखा कि ये भी कयामत थी. पतली कमर, तिरछी नजर, रसीले होंठ, खुले बाल, नुकीले चूचे … गजब की कातिल थी ये निम्मी.
मैं उस पर मोहित हो गया. मेरी धोती में हलचल होने लगी.

मैंने निम्मी के बाल पकड़े और उसे अपने करीब खींचा.
वो मेरी आंखों में आंखें डालकर वासना से देख रही थी.

मैंने लंड सहलाया, तो वो मुस्कुरा दी.
उसके मुस्कुराते ही मैंने उसके गाल पर एक जोरदार चुम्मी ले की.

मुझे लगा कि उसको बुरा लगेगा, पर उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान आ गई थी.
मतलब वो गर्म हो चुकी थी और चुदवाने को तैयार थी.

मैंने भी उसको चोदने का मन पक्का कर लिया. मैंने फिर से मुँह आगे किया और इस बार उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
साथ ही मेरे दोनों हाथ उसके चूचों पर चले गए‌.

मैंने निम्मी को किस करते हुए अनीता की तरफ देखा और इशारे से पूछा- चुदाई कर दूँ इसकी?
अनीता ने भी इशारे में हां बोल दिया.

किस करते हुए मैंने निम्मी के कपड़े उतार फेंके.
आह … क्या संगमरमर सा गोरा बदन था उसका … तने हुए दूध लंड की सख्ती बढ़ा रहे थे.
उसके पिछवाड़े का ठोस उभार मुझे गर्म कर रहा था.

मेरा मन उसके पिछवाड़े पर ही आ गया था पर शुरुआत तो सामने से ही करनी पड़ती है ना.

मैंने उसके दोनों चूचे दबोच लिए. एक को मुँह में भर लिया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा.
उसकी मदभरी सिसकारियां घर में गूंजने लगीं.

एक के बाद दूसरा दूध … ऐसे करके उसके दोनों दूध चूस चूस कर लाल करता रहा.
उसके दूध एकदम सख्त हो गए थे और निप्पल एकदम अंगूर से कड़क.
मैं उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से अपने मुँह में लेकर खींच खींच कर चूस रहा था और वो मेरे सर पर हाथ फेर कर मुझे अपने दूध चूसने को अन्दर दिए जा रही थी.

कुछ मिनट के बाद मैं चूचे छोड़ कर नीचे की तरफ सरक आया और उसकी नाभि में अपनी जुबान की नोक घुसाने लगा.
उसने कसमसाई आंखें बंद कर ली थीं, होंठों को दांतों तले दबा रही थी, मुट्ठी में चादर दबा रखी थी.

किसी तरह उसने अपने अन्दर के तूफान को दबा रखा था.
अब मैं मोर्चा नीचे ले गया और उस तपती भट्टी के द्वार पर अपनी जुबान लगा दी.
जुबान करतब दिखाने जा ही रही थी कि अचानक निम्मी की चीख निकली और ज्वालामुखी फट गया.

निम्मी कांपती हुई बहने लगी.
उसका चेहरा वासना से लाल और कामुक हो गया था.
वो मेरी तरफ एकदम मादक नजरों से देख रही थी, उसके पैर भी कंप रहे थे.

करीब 2 मिनट बाद वो शांत हुई.
मैंने फिर से जुबान उसकी चूत पर लगायी और उसके मूत्रछिद्र को सहलाया.

वो फिर से लय में आने लगी.
मैंने जैसे ही जुबान की नोक उसकी चूत के अन्दर घुसाई, उसकी एक टांग ऊपर हुई और हिलने लगी.

क्या बला की शै थी.
उसकी हर हरकत पर मेरा लंड खड़ा हो रहा था.

करीब 15 मिनट की चूत चुसाई के बाद मैं ऊपर उठा और लंड उसकी टांगों को छूने लगा.
मैंने उसे फिर से किस किया और उसके कंधे को पकड़ कर उसे नीचे बिठा दिया.

अब मेरा लंड उसके मुँह के सामने था पर उसको घृणा हो रही थी. शायद उसके पति ने उसके मुँह में लंड न दिया हो.

पर मैं कहां मानने वाला था, मैंने उसके होंठों पर लंड रगड़ना चालू कर दिया.
उसने अनीता की ओर देखा.
अनीता ने उसे इशारे से लंड मुँह में लेने को समझा दिया.

इस बार उसका मुँह खुला और उसने जुबान बाहर निकाल कर लंड को टच किया.
उसने लंड का स्वाद चखा, फिर आंख बंद करके लंड को मुँह में ले लिया.

आह … अब वो किसी रांड की तरह लप लप करके लंड अन्दर बाहर किए जा रही थी.

मेरा लंड और कड़ा होता गया. लंड का टोपा फूल गया था.

उसे लंड चूसने में दिक्कत होने लगी थी.
मैंने उसको उठाया और चारपाई पर औंधा लेटा दिया.

अब उसकी गांड मेरी तरफ थी. मैंने पीछे से उसकी गांड को किस किया.
मैंने उसकी गांड के होल पर बहुत सारा थूक मल दिया, अपने लंड को उस थूक में डुबोकर उसकी चूत में उतारने लगा.

सच में बड़ी कड़क माल थी … मुझसे रहा न गया और मैंने एक ही झटके में पूरा लंड चूत के अन्दर पेल दिया.
निम्मी की चीख निकल गयी- आह मर गई माई रे … छोड़ दो जीजा साब. मेरी फट गई. आह मर जाऊंगी ठाकुर साब … आह.

वो जल बिन मछली सी तड़फ रही थी.
मेरा फौलादी लंड उसकी नन्ही सी चूत को चीर कर अन्दर फंस गया था.

उसकी चूत सच में काफी टाईट थी.
मुझे लग रहा था मानो मेरा लंड जैसे कहीं अटक गया था.
उसकी नसों ने जैसे मेरे लंड को जकड़ लिया था.

मगर ये मैं था, कहां मानने वाला था.
मैंने उसकी दोनों चूचियों के निप्पल हाथ से पकड़ कर उमेठे तो उसका दर्द बंट गया. उसी के साथ मैंने चूत में धक्का लगाना चालू कर दिया.

एक साथ दो जगह हमला हो रहा था, चूत में लंड चल रहा था और उसके चूचे भी मसले जा रहे थे.

वो उन्ह आंह करती हुई अपनी आवाज कुछ धीमी करने लगी थी.
मैं समझ गया कि निम्मी लंड को लील चुकी है. मैं उसकी गर्दन घुमाकर उसे किस करने लगा.

अनीता ये सब देख रही थी. दोनों पड़ोसन थीं … सहेलियां भी थीं.
अब निम्मी मस्ती से चुद रही थी.
ठप ठप की आवाज गूंज रही थी.

कुछ देर बाद मैंने उसे पलट दिया.
उसकी दोनों टांगें ऊपर हवा में लहराकर उसके मुँह की तरफ कर दीं.

इस तरह से लिटाने से मुझे उसकी चूत और गांड का होल साफ नजर आ रहा था.
मैंने उसकी चूत में फिर से अपना लंड घुसा दिया और धकापेल ठोकने लगा.

उसी दौरान मैंने अनीता को इशारे से अपने करीब बुला लिया.
उसे चुम्मी की और उससे कहा- इसके मुँह पर चूत रख कर बैठ जा, इसे अपनी चूत चाटने को दे.
उसने भी वैसे ही किया.

अब मैं निम्मी को चोद रहा था और अनीता उससे अपनी चूत चटवा रही थी.
हम दोनों निम्मी का मजा ले रहे थे.

कुछ देर बाद मैंने अपना लंड निकाल लिया और अपने लंड पर थूक लगा कर गांड के छेद पर सैट कर दिया.
अनीता को इशारा किया कि उसे हिलने मत देना.

निम्मी कुछ समझ पाती, तब तक मैंने उसकी गांड फैलाकर लंड को सैट कर दिया और एक जोर का झटका दे मारा.
मेरा आधा लंड निम्मी की गांड में जाकर फंस गया.

निम्मी छटपटाने लगी, पैर हिलाने लगी पर कुछ बोल नहीं पाई.
उसकी आंखों से आंसू निकल आए, पर अनीता की चूत में उसकी आवाज दब कर रह गई.

मैंने दूसरा धक्का मारा, तो पूरा लंड गांड की दीवारों को चीरता हुआ पूरा अन्दर दाखिल हो गया.
वो चीख भी ना सकी, ना हिल सकी क्योंकि अनीता की चूत उसके मुँह को दबाए हुई थी.

इधर मैंने भी उसकी कमर कसकर पकड़ रखी थी.

मैं गांड की सील तोड़ने में उस्ताद हो गया था. लंड ने गांड फाड़ दी थी लेकिन निम्मी की आंख से आंसू रुक ही नहीं रहे थे.

मैंने धक्का देना शुरू कर दिया.
हर धक्के पर निम्मी हिल जाती और अनीता के चूत पर उसका मुँह रगड़ जाता.

मैंने अनीता को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और किस करना चालू कर दिया.
अब मैं चोद निम्मी को रहा था, पर किस अनीता को कर रहा था.

अनीता भी मस्ती से अपनी कमर चला कर चूत चटवाने का सुख ले रही थी.
हम लोगों का त्रिकोण बन गया था. मेरा लंड निम्मी की गांड में, निम्मी का मुँह अनीता की चूत में … और अनीता के होंठ मेरे होंठों में थे.

मेरे धक्के निम्मी को, निम्मी की जीभ चाट रही अनीता की चूत को … और अनीता के होंठों का रस मैं चूस रहा था.

ऐसे ही दस मिनट हो गए.
मैंने अब आसन बदला.

निम्मी को औंधे मुँह चारपाई पर लेटा दिया, उसका एक पैर जमीन पर, एक पैर खटिया पर. इस आसन से उसके पीछे वाला छेद साफ दिखाई दे रहा था.

छेद खुला खुला सा दिख रहा था. मैंने पोजिशन ली, लंड पर थूक मला और एक करारा धक्का दे मारा.
एक ही बार में मेरा लंड जड़ तक पहुंच गया.

निम्मी के मुँह से आऊच निकला और वो बोली- आंह जीजा साहब … आहिस्ता से करो ना … दर्द हो रहा है. पहली बार इस जगह का इस्तेमाल हुआ है. आराम से करो, मुझे मजा आ रहा है. मैंने आज तक ऐसे मजा नहीं लिया. दर्द में मजा होता है, ये मैंने आज ही जाना.

मुझे उसके मुँह से ये सब सुनकर बहुत अच्छा लगा.
मैं काफी खुश हो जाता हूँ जब कोई मुझसे ये बोले कि वो मुझसे चुदवा कर खुश हो गयी है. इस बात का नशा ही अलग होता है.

मैंने धक्के जारी रखे. मैंने एक हाथ नीचे करके उसकी चूत के दाने को छुआ, चूत में आग सी तप रही थी.

मैं दाना सहलाने लगा, वो मस्त हो उठी.
कुछ 5 मिनट में ही वो झड़ने लगी.

मैं भी जोर से उसकी गांड चोदने लगा.
अब मेरा बाँध फूटा और पिचकारी छूट गई, उसकी पूरी गांड मेरे वीर्य से भर गयी.
मैं उसी हालत में उस पर लेट गया.

हम दोनों पसीने में लथपथ थे.

मेरा लंड मुर्दा होकर गांड से बाहर निकल आया और सारा रस निम्मी की टांगों से होकर नीचे गिरने लगा.

मैं उठ कर खड़ा हुआ और कपड़े पहन लिए.
उसने भी साड़ी पहन ली. मैंने उस देखा, उसे चलने में तकलीफ हो रही थी.

मैंने उसे पास बुलाया और उसको कुछ रुपए पकड़ा दिए.
वो खुश हो गई और मुस्कुराने लगी.

मैंने अनीता को भी रूपए दिए.
अनीता ने ना बोल दिया और बोली- मालिक, बस हमारा कर्जा माफ कर दो.

मैं बोला- अरे मेरे रानी, ये तो खुशी से दे रहा हूँ. मुझे अपना वादा याद है. पर तुझे भी याद है ना कि मुझे क्या चाहिए?
अनीता बोली- मालिक अपने बीज डाल दिया है, तो मैं उसे अपना भाग्य समझूंगी.

मैंने उसके हाथ में रूपए थमा दिए.
वो भी मुस्कुराने लगी और मैं वहां से चल दिया.

अगली बार किसी और की चूत या गांड में लंड पेलूँगा, तो आपको सेक्स कहानी का मजा दूँगा.

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